लंबे लॉक डाउन से वादकारियो को हो रही परेशानी दूर करने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट के सात न्याय पीठों ने मुकदमों की सुनवाई प्रक्रिया शुरू कर दी है। हालांकि अभी लघु अपराधों के जमानत प्रार्थना पत्रों और क्रिमिनल रिट की सुनवाई की जा रही है। अदालत उन्हीं मामलों में आदेश पारित कर रही है जिनमें तत्काल आदेश दिए जाने की आवश्यकता है। इस उद्देश्य से मुख्य न्यायमूर्ति गोविन्द माथुर सहित छह एकल न्यायपीठे गठित की गई है। जबकि एक खंडपीठ आपराधिक याचिकाओं की सुनवाई के लिए बनाई गई है।
इलाहाबाद हाइकोर्ट की सात न्यायपीठों में सुनवाई शुरू, लघु अपराधों और क्रिमिनल रिट को प्राथमिकता
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न्यायपीठों ने 18 और 19 मार्च को सूचीबद्ध मुकदमों की सुनवाई मंगलवार और बुधवार की। इन सभी मुकदमों में सरकार और वकीलों से ईमेल के जरिए अपना पक्ष रखने के लिए कहा गया है। हालांकि अदालत उन मामलों में भी आदेश पारित कर रही है जिनमें सरकार या दूसरे पक्ष ने ईमेल से जवाब नहीं भेजा है।
दो माह आपत्ति की छूट लॉक डाउन के दौरान न्यायपीठे जिन मामलों में आदेश पारित कर रही हैं यदि उसमें दूसरा पक्ष सरकार, शिकायतकर्ता या कोई अन्य व्यथित व्यक्ति यदि उसे लगता है कि तथ्यों को सही रूप से प्रस्तुत नहीं किया गया है तो वह दो माह के भीतर आदेश को रिकॉल कॉल करने अथवा संशोधित करने की अर्जी दाखिल कर सकता है ।
मंगलवार को न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति समित गोपाल की पीठ ने कन्नौज के इंदिरा पुर थाने के गैंगस्टर के एक मामले में गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए ऐसा ही आदेश पारित किया। सराय इनायत प्रयागराज के अवनीश कुमार की याचिका पर भी कोर्ट ने गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए सरकार व अन्य पक्षकारों को छूट दी है कि यदि इनको लगता है कि कोई तथ्य छुपाया गया है तो वह रिकॉल या संशोधन की अर्जी दाखिल कर सकते हैं।
हो सकती है वीडियो कांफ्रेंसिंग से सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाई कोर्टों को वीडियो कांफ्रेंसिंग से भी मुकदमों की सुनवाई का निर्देश दिया है ।सर्वोच्च अदालत का मानना है की न्याय पाना व्यक्ति का मौलिक अधिकार है और लॉक डाउन की स्थिति में कुछ समय के लिए वीडियो कांफ्रेंसिंग से सुनवाई जैसी व्यवस्था की जा सकती है ।सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाई कोर्टों को अपनी सुविधा के अनुसार वीडियो कांफ्रेंसिंग से सुनवाई की रूपरेखा तय करने के लिए कहा है । इलाहाबाद हाईकोर्ट में पहले से ही दो ई कोर्टे कार्य कर रही है ।वीडियो कांफ्रेंसिंग की सुविधा भी यहां है जानकारों का मानना है जरूरत पड़ने पर सिस्टम को अपग्रेड करके कुछ अदालतों को वीडियो कांफ्रेंसिंग से सुनवाई के लिए तैयार किया जा सकता है। हालांकि इस संबंध में अभी अंतिम रूपरेखा तय किया जाना बाकी है।