UP: ईदगाह और कृष्ण जन्मभूमि विवाद के सभी मामलों की सुनवाई करेगा हाईकोर्ट, पैरवी के लिए न्याय मित्र नियुक्त
यह आदेश शुक्रवार को न्यायमूर्ति अरविंद कुमार मिश्र ने इस मामले में श्रीकृष्ण विराजमान मंदिर एवं अन्य सात की ओर से दाखिल याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है। कोर्ट ने इस मामले में तीन मई को याचिका की सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित कर लिया था।
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मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि एवं शाही ईदगाह मस्जिद संबंधी भूमि विवाद से जुड़े सभी मुकदमों की सुनवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट एक साथ करेगा। हाईकोर्ट ने मथुरा के जिला जज को इस मामले से जुड़े सभी मुकदमों के दस्तावेज दो सप्ताह में भेजने को कहा है। इसके साथ ही कोर्ट ने इस मामले को मुख्य न्यायाधीश को अग्रसारित करते हुए सुनवाई के लिए उपयुक्त पीठ नामित करने का भी आग्रह किया है।
यह आदेश शुक्रवार को न्यायमूर्ति अरविंद कुमार मिश्र ने इस मामले में श्रीकृष्ण विराजमान मंदिर एवं अन्य सात की ओर से दाखिल याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है। कोर्ट ने इस मामले में तीन मई को याचिका की सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित कर लिया था। याची के अधिवक्ता विष्णु जैन ने कहा कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि एवं शाही ईदगाह मस्जिद के बीच 13.37 एकड़ भूमि के विवाद को लेकर मथुरा की अदालत में याचिका दाखिल करते समय 10 मुकदमे लंबित थे। अब कुछ और नए मुकदमे दाखिल हुए हैं।
भूमि विवाद से संबंधित सभी मामलों की सुनवाई एक साथ किए जाने और हाईकोर्ट स्थानांतरित किए जाने की मांग को लेकर यह याचिका दाखिल की गई थी। याचिका में मांग की गई थी कि अयोध्या राम मंदिर विवाद की तर्ज पर मथुरा के इस विवाद की सुनवाई भी हाईकोर्ट में की जाए। कहा गया था कि मामले में शामिल मुद्दे भगवान श्रीकृष्ण के करोड़ों भक्तों से संबंधित हैं और यह मामला राष्ट्रीय महत्व का है।
साथ ही शाही ईदगाह मस्जिद के कब्जे वाली 13.37 एकड़ भूमि को श्रीकृष्ण जन्मभूमि का स्थान बताकर उसे हिंदुओं को सौंपे जाने की मांग भी की गई है। विपक्षी पक्षकार यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड, प्रबंधन ट्रस्ट की समिति, शाही मस्जिद मथुरा, श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट और श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान अपना जवाब दाखिल कर चुके हैं। इस मांग को लेकर मथुरा की अदालत में कई मुकदमे दाखिल हैं।
भूमि विवाद से जुड़े इन सभी मामलों की सुनवाई अब इलाहाबाद हाईकोर्ट में होगी। हाईकोर्ट में भगवान श्रीकृष्ण विराजमान सात अन्य की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हरिशंकर जैन, एडवोकेट विष्णु शंकर जैन, प्रभाष पांडेय और प्रदीप कुमार शर्मा ने बहस की। सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल भी फैसला सुनाए जाने के दौरान मौजूद रहे।