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High Court : एफआईआर में अश्लील शब्दों व गालियों के हूबहू इस्तेमाल लगे लगाम
Sat, 23 May 2026 11:37 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 23 May 2026 11:37 AM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पीड़ित पक्ष की ओर से गुस्से में लिखी तहरीर में अश्लील शब्दों और गालियों को हूबहू लिखने पर कड़ी नाराजगी जताई है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पीड़ित पक्ष की ओर से गुस्से में लिखी तहरीर में अश्लील शब्दों और गालियों को हूबहू लिखने पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक को परिपत्र (दिशानिर्देश) जारी कर एफआईआर मेंअश्लील शब्दों के प्रयोग पर तत्काल लगाम लगाने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति हरवीर सिंह की एकल पीठ ने बलिया के प्रेमशंकर राम की जमानत अर्जी खारिज करते हुए दिया है।
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मामला बलिया में दर्ज मारपीट का है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि एफआईआर के अनुच्छेद 12 में बेहद आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया था। कोर्ट ने कहा कि डिजिटल युग में एफआईआर एक सार्वजनिक दस्तावेज है। इसे समाज का कोई भी नागरिक, महिला या पुरुष इंटरनेट पर पढ़ सकता है।
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ऐसे में योग्य और शिक्षित पुलिस अधिकारियों की ओर से ऐसी संकीर्ण और अमर्यादित भाषा का प्रयोग एक सभ्य और लोकतांत्रिक समाज की छवि को धूमिल करता है।
पीड़ित गाली दे, तब भी पुलिस बदले शब्द
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि कोई पीड़ित या शिकायतकर्ता अपनी तहरीर में अपशब्दों या गाली-गलौज का उल्लेख करता भी है तो पुलिस का कर्तव्य है कि वह एफआईआर दर्ज करते समय उन शब्दों को हूबहू लिखने से बचे। उनके स्थान पर रोजमर्रा की बोलचाल के सभ्य और सामान्य शब्दों का प्रयोग किया जाना चाहिए। कोर्ट ने फैसले में मौजूदा मामले के अलावा बिजनौर, बस्ती, शामली, भदोही, वाराणसी और झांसी समेत कई जिलों की एफआईआर का हवाला भी दिया जहां ऐसी ही अभद्र भाषा पाई गई थी।
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रातों-रात सामाजिक बदलाव लाना कठिन हो सकता है लेकिन पुलिस प्रशासन को अधिक संवेदनशील और पेशेवर बनाने के लिए इस समस्या से कड़ाई से निपटना होगा। - हाईकोर्ट