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हड़ताल पर हाईकोर्ट सख्त, 75 अधिवक्ता संघों को नोटिस
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
Updated Wed, 25 Mar 2015 12:06 AM IST
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जिला अदालतों में आए दिन हो रही हिंसक वारदातों और वकीलों की हड़ताल पर हाईकोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। मंगलवार को इस पूरे मामले पर स्वत: संज्ञान लेते हुए मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में सात जजों की वृहद पीठ बैठी। पीठ ने हाल के दिनों में कई जिला अदालतों और हाईकोर्ट में चली लंबी हड़ताल के मद्देनजर सूबे के 75 जिला अधिवक्ता संघों के सचिवों को नोटिस जारी किया है।
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, बार कौंसिल ऑफ इंडिया और बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश को भी नोटिस जारी किया है। स्वत: योजित इस जनहित याचिका में मुख्य न्यायमूर्ति डा. डीवाई चंद्रचूड, न्यायमूर्ति राकेश तिवारी, न्यायमूर्ति राजेश कुमार, न्यायमूर्ति वीके शुक्ला, न्यायमूर्ति अरुण टंडन, न्यायमूर्ति तरुण अग्रवाल, और न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता सुनवाई कर रहे हैं। पीठ ने मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव गृह और पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश को भी नोटिस जारी किया है। हड़ताल के साथ ही कचहरियों की सुरक्षा भी पीठ के समक्ष अहम मुद्दा है।
वृहद पीठ ने साफ कहा कि सुप्रीमकोर्ट द्वारा हड़ताल को अवैधानिक करार दिया जा चुका है। इस स्थिति में अनिश्चितकालीन हड़ताल सर्वोच्च अदालत के आदेश का उल्लंघन है। हाल के दिनों में कई जिलों की कचहरियों में हुई हिंसक वारदातों पर चिंता जताते हुए पीठ ने कहा कि वकीलों की हड़ताल का सीधा असर अदालतों के संवैधानिक दायित्व के निर्वहन पर पड़ता है। अदालतें वादकारियों को न्याय देने के अपने दायित्व को पूरा नहीं कर पा रही हैं। हाल के दिनों में हुई कई घटनाओं से पता चला है कि अधीनस्थ अदालतों की सुरक्षा से गंभीर समझौता किया गया है। इन अदालतों में वकील, जज, वादकारी, कर्मचारी और अधिकारी बड़ी संख्या में आते हैं। सुरक्षा एक अहम मुद्दा है।
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वृहद पीठ जिला अदालतों में उचित सुरक्षा की व्यवस्था करना, सीसीटीवी लगवाना, वकीलों, जजों, कर्मचारियों, वादकारियों को बायोमैट्रिक कार्ड उपलब्ध कराने के साथ जिला अदालतों में असलहों के साथ प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने जैसे बिंदुओं पर विचार करेगी। पीठ ने कहा कि इस बात में कोई संदेह नहीं कि अदालत परिसर में शस्त्र ले जाना अवैध है। इस पर पूरी तरह से रोक लगानी होगी। सात साल या उससे अधिक की सजा पा चुके लोगों को वकालत करने का अधिकार देने पर भी वृहदपीठ में विचार होगा। याचिका पर सात अप्रैल 2015 को अगली सुनवाई होगी। 11 मार्च को इलाहाबाद कचहरी में दरोगा शैलेंद्र सिंह ने अधिवक्ता नबी अहमद की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस घटना को लेकर कचहरी के वकील अभी हड़ताल पर हैं।
हद पीठ ने सोमवार को हाईकोर्ट के कॉरिडोर में नारेबाजी करने तथा अदालतों का दरवाजा बंद करने की घटना पर गहरी नाराजगी जताते हुए कड़ी कार्रवाई के संकेत दिए हैं। पीठ ने सूबे के सभी जिला जजों को हड़ताल में शामिल वकीलों की रिपोर्ट महानिबंधक को प्रेषित करने का निर्देश दिया है। जिला जजों को हर सप्ताह रिपोर्ट भेजनी होगी। सोमवार को हाईकोर्ट के कॉरिडोर में नारेबाजी करने और न्यायिक कार्य में व्यवधान डालने वाले वकीलों को चिह्नित करने का महानिबंधक को निर्देश दिया है। उनका नाम हाईकोर्ट बार एसोसिएशन और अन्य स्रोतों से मांगा जाएगा।
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हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, बार कौंसिल ऑफ इंडिया और बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश को भी नोटिस जारी किया है। स्वत: योजित इस जनहित याचिका में मुख्य न्यायमूर्ति डा. डीवाई चंद्रचूड, न्यायमूर्ति राकेश तिवारी, न्यायमूर्ति राजेश कुमार, न्यायमूर्ति वीके शुक्ला, न्यायमूर्ति अरुण टंडन, न्यायमूर्ति तरुण अग्रवाल, और न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता सुनवाई कर रहे हैं। पीठ ने मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव गृह और पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश को भी नोटिस जारी किया है। हड़ताल के साथ ही कचहरियों की सुरक्षा भी पीठ के समक्ष अहम मुद्दा है।
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वृहद पीठ ने साफ कहा कि सुप्रीमकोर्ट द्वारा हड़ताल को अवैधानिक करार दिया जा चुका है। इस स्थिति में अनिश्चितकालीन हड़ताल सर्वोच्च अदालत के आदेश का उल्लंघन है। हाल के दिनों में कई जिलों की कचहरियों में हुई हिंसक वारदातों पर चिंता जताते हुए पीठ ने कहा कि वकीलों की हड़ताल का सीधा असर अदालतों के संवैधानिक दायित्व के निर्वहन पर पड़ता है। अदालतें वादकारियों को न्याय देने के अपने दायित्व को पूरा नहीं कर पा रही हैं। हाल के दिनों में हुई कई घटनाओं से पता चला है कि अधीनस्थ अदालतों की सुरक्षा से गंभीर समझौता किया गया है। इन अदालतों में वकील, जज, वादकारी, कर्मचारी और अधिकारी बड़ी संख्या में आते हैं। सुरक्षा एक अहम मुद्दा है।
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वृहद पीठ जिला अदालतों में उचित सुरक्षा की व्यवस्था करना, सीसीटीवी लगवाना, वकीलों, जजों, कर्मचारियों, वादकारियों को बायोमैट्रिक कार्ड उपलब्ध कराने के साथ जिला अदालतों में असलहों के साथ प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने जैसे बिंदुओं पर विचार करेगी। पीठ ने कहा कि इस बात में कोई संदेह नहीं कि अदालत परिसर में शस्त्र ले जाना अवैध है। इस पर पूरी तरह से रोक लगानी होगी। सात साल या उससे अधिक की सजा पा चुके लोगों को वकालत करने का अधिकार देने पर भी वृहदपीठ में विचार होगा। याचिका पर सात अप्रैल 2015 को अगली सुनवाई होगी। 11 मार्च को इलाहाबाद कचहरी में दरोगा शैलेंद्र सिंह ने अधिवक्ता नबी अहमद की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस घटना को लेकर कचहरी के वकील अभी हड़ताल पर हैं।
हद पीठ ने सोमवार को हाईकोर्ट के कॉरिडोर में नारेबाजी करने तथा अदालतों का दरवाजा बंद करने की घटना पर गहरी नाराजगी जताते हुए कड़ी कार्रवाई के संकेत दिए हैं। पीठ ने सूबे के सभी जिला जजों को हड़ताल में शामिल वकीलों की रिपोर्ट महानिबंधक को प्रेषित करने का निर्देश दिया है। जिला जजों को हर सप्ताह रिपोर्ट भेजनी होगी। सोमवार को हाईकोर्ट के कॉरिडोर में नारेबाजी करने और न्यायिक कार्य में व्यवधान डालने वाले वकीलों को चिह्नित करने का महानिबंधक को निर्देश दिया है। उनका नाम हाईकोर्ट बार एसोसिएशन और अन्य स्रोतों से मांगा जाएगा।