हाईकोर्ट ने कहा : अवैधानिक आदेश के कारण सेवा से वंचित रही अध्यापिका पूर्ण वेतन की हकदार, बीएसए का आदेश निरस्त
यह आदेश न्यायमूर्ति मंजेश शुक्ला की अदालत ने झांसी में तैनात सहायक अध्यापिका नेहा पटेल की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया। याची नेहा पटेल ने बेसिक शिक्षा अधिकारी झांसी द्वारा अंतर्जनपदीय स्थानान्तरण को निरस्त कर कार्यमुक्त करने वाले आदेश को चुनौती दी थी।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अंतरजनपदीय स्थानान्तरण को अवैधानिक तरीके से निरस्त कर अध्यापिका को शिक्षण कार्य से वंचित करने वाले आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट ने याची शिक्षिका के प्रारंभिक तैनाती की तिथि से समस्त लाभों सहित पूर्ण वेतन प्रदान करने के साथ ही झांसी में तैनाती का आदेश दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति मंजेश शुक्ला की अदालत ने झांसी में तैनात सहायक अध्यापिका नेहा पटेल की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया। याची नेहा पटेल ने बेसिक शिक्षा अधिकारी झांसी द्वारा अंतर्जनपदीय स्थानान्तरण को निरस्त कर कार्यमुक्त करने वाले आदेश को चुनौती दी थी।
याची ने चित्रकूट से झांसी अंतर्जनपदीय स्थानांतरण हेतु आवेदन किया गया था। याची द्वारा अपने पति के असाध्य बीमारी से पीड़ित होने और सहायता प्राप्त प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक होने के भारांक के आधार पर झांसी स्थानांतरण करवाया गया था। झांसी में कार्यभार ग्रहण करने के माह के बाद बेसिक शिक्षा अधिकारी, झांसी ने याची के पति के सरकारी सेवा में होने के भारक को नियमानुसार ने मानते हुए याची के अंतर्जनपदीय स्थानांतरण को निरस्त कर पुनः चित्रकूट में कार्यभार ग्रहण करने के लिए कार्यमुक्त कर दिया।
याची के अधिवक्ता ऋषि श्रीवस्ताव और राजकुमार सिंह का कहना था कि दी जून 2023 और 29 जून 2023 के शासनादेशों एवं बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा जारी विभिन्न सर्कुलरों के अनुसार किसी एक भारांक हेतु योग्य न पाए जाने पर भी याची के स्थानांतरण को निरस्त नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने बेसिक शिक्षा अधिकारी के आदेश को अवैधानिक मानते हुए कहा कि अधिकारी द्वारा पारित गलत आदेश के कारण सेवाओ से वंचित रही अध्यापिका तैनाती की तिथि से समस्त लाभों सहित पूर्ण वेतन की हकदार है।