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UP : निवेशकों की धनराशि की हेराफेरी के मामले में हाईकोर्ट सख्त, आयकर विभाग को जांच में सहयोग का निर्देश

Sun, 01 Mar 2026 04:38 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 01 Mar 2026 04:38 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ईटेक्नोक्रेट्स-एक्सिस बैंक के खाते में निवेशकों की धनराशि की हेराफेरी के मामले में नाराजगी जताई है। कोर्ट ने विवेचक को अगली तारीख पर रिकॉर्ड संग तलब कर आयकर विभाग को जांच में सहयोग का निर्देश दिया है।

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High Court takes strict action in case of misappropriation of investors funds
कोर्ट (प्रतीकात्मक फोटो) - फोटो : एएनआई

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ईटेक्नोक्रेट्स-एक्सिस बैंक के खाते में निवेशकों की धनराशि की हेराफेरी के मामले में नाराजगी जताई है। कोर्ट ने विवेचक को अगली तारीख पर रिकॉर्ड संग तलब कर आयकर विभाग को जांच में सहयोग का निर्देश दिया है।

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यह आदेश न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकल पीठ ने मो.आसिफ की ओर से दायर आपराधिक जमानत प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए दिया। शासकीय अधिवक्ता ने दलील दी कि ईटेक्नोक्रेट्स-एक्सिस बैंक के निदेशक आदिल वासी के खाते में निवेशकों की ओर से जमा धनराशि की कथित हेराफेरी (साइफनिंग) की जांच चल रही है। जांच इस बात को लेकर जारी है कि उक्त धनराशि का उपयोग किन-किन माध्यमों से किया गया और क्या उससे करोड़ों रुपये की संपत्तियां खरीदी गईं।
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शासकीय अधिवक्ता ने दलील दी कि आरोपी मो.आसिफ की कथित संलिप्तता की जांच की जा रही है, जिसमें उसकी पत्नी की ओर से खरीदी गईं 10 दुकानों सहित कई अचल संपत्तियों का मामला सामने आया है। आरोपी ने अपने दो आपराधिक मामलों (एक कोतवाली थाने में और दूसरा नैनी थाने में) का स्पष्टीकरण नहीं दिया है। इस पर बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने शेष मामलों का जल्द स्पष्टीकरण देने की बात कही।
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12 फरवरी 2026 के आदेश के अनुपालन में विवेचक व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित हुए। कहा कि निवेशकों की जमा धनराशि की हेराफेरी और आरोपी की भूमिका की जांच प्रगति पर है। शासकीय अधिवक्ता ने दलील दी कि विवेचक की ओर से प्रस्तुत प्रार्थना पत्र को मुख्य आयकर आयुक्त की ओर से निरस्त कर दिया गया। आयकर विभाग के असहयोग के कारण आरोपी की आय संबंधी जांच आगे नहीं बढ़ सकी।


कोर्ट ने मुख्य आयकर आयुक्त को आरोपी और सह-आरोपियों की आय और खातों से संबंधित आवश्यक सूचनाएं उपलब्ध कराकर जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने मामले को 16 मार्च 2026 से प्रारंभ होने वाले सप्ताह में पुनः सूचीबद्ध करने का आदेश दिया है। साथ ही विवेचक को अगली तिथि पर संबंधित अभिलेखों के साथ पुनः व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं। 

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