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आजम खां पर हुई कार्रवाई का ब्योरा तलब, हाईकोर्ट ने 15 दिन में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया

Wed, 29 Jan 2020 09:28 PM IST
Vikas Kumar अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज Published by: Vikas Kumar Updated Wed, 29 Jan 2020 09:28 PM IST
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High court summoned the details of action taken on Azam Khan
आजम खां - फोटो : अमर उजाला

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूर्व मंत्री और रामपुर के सपा सांसद मोहम्मद आजम खां पर जौहर विश्वविद्यालय के नाम पर करोड़ों रुपए की संपत्ति का घोटाला करने के मामले में राज्य सरकार को हलफनामा दाखिल कर जवाब दाखिल करने के लिए 15 दिन की मोहलत दी है। 

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इससे पूर्व कोर्ट ने 22 जनवरी को सरकार से इस मामले में जवाब मांगा था। बुधवार को याचिका पर सुनवाई के दौरान प्रदेश सरकार के अधिवक्ता ने मौखिक रूप से की गई कार्रवाई का ब्योरा देना शुरू किया। उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी उपलब्ध करा दी गई है। कोर्ट ने इसे हलफनामे के रूप में 15 दिन में दाखिल करने का निर्देश दिया है।
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याचिका पर 15 दिनों के बाद सुनवाई होगी। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति बिश्वनाथ सोमद्दर और न्यायमूर्ति वाईके श्रीवास्तव की पीठ ने की। रामपुर के फैसल खां लाला ने आजम खां पर जौहर अली विश्वविद्यालय और जौहर ट्रस्ट बनाकर करोड़ों रुपये की सार्वजनिक संपत्ति का घोटाला करने का आरोप लगाया है। 
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उन्होंने इस मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग को लेकर जनहित याचिका दाखिल की है। याची के अधिवक्ता का कहना था कि आजम खां ने जौहर विश्वविद्यालय के नाम से प्राइवेट यूनिवर्सिटी बनाई है। जिसमें विभिन्न विभागों की लगभग 88 करोड़ रुपये की सार्वजनिक संपत्ति पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया गया।

जौहर ट्रस्ट के नाम से आजम खां ने निजी ट्रस्ट बना लिया है, जिसके नौ सदस्यों में से पांच उनके परिवार के लोग ही  हैं। जबकि चार अन्य उनके विश्वासपात्र लोग हैं। ट्रस्ट के नाम पर कब्जा की सार्वजनिक संपत्ति का निजी फायदे में इस्तेमाल हो रहा है। 


सपा सरकार में मंत्री रहने के दौरान उन्होंने विभिन्न विभागों की संपत्तियों से विश्वविद्यालय को फायदा पहुंचाया है। गरीब किसानों की भी सैकड़ों बीघा जमीन कब्जा कर ली गई। इस मामले में डीएम और कमिश्नर की रिपोर्ट में उच्च स्तरीय जांच की संस्तुति की गई है।

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