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नई कंपाउंडिंग स्कीम 2020 लागू करने पर हाईकोर्ट की रोक
Mon, 12 Oct 2020 01:47 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Mon, 12 Oct 2020 01:47 AM IST
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इलाहाबाद हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने किसी भी हद तक किए गए अवैध निर्माणों को कंपाउडिंग शुल्क लेकर नियमित करने के लिए लाई गई प्रदेश सरकार की नई कंपाउडिंग स्कीम 2020 को लागू करने पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने प्रदेश सरकार सहित सभी विकास प्राधिकरणों को इस नई योजना पर अमल न करने का निर्देश देते हुए कहा है कि प्रथम दृष्टया यह योजना अर्बन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट एक्ट के प्रावधानों का उल्लंघन कर किए गए अवैध निर्माणों को नियमित करने के इरादे से लाई गई है। राज्य के अधिकारियों से अपेक्षा है कि वह अवैध निर्माणों को रोकेगें न कि बढ़ावा देंगे। कोर्ट के इस आदेश से नियम के विपरीत निर्माण करके बाद में उसे कंपाउडिंग के जरिए वैध करने वाले भवन निर्माताओं को बड़ा झटका लगा है।
शाहजहांपुर के मेहर खान अंसारी की याचिका पर सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र ने इस मामले में अपर मुख्य सचिव शहरी विकास विभाग से 20 अक्तूबर तक हलफनामा दाखिल करने के लिए कहा है। कोर्ट ने कहा कि इस प्रकार की योजनाएं ऐसे ईमानदार नागरिकों को हताश करती हैं जो नियमों का पालन करते हुए निर्माण की अनुमति लेकर कानून के तहत निर्माण करते हैं। ऐसे लोगों को नियमों का सख्ती से पालन करने के लिए बाध्य भी किया जाता है। जबकि भवन निर्माण कानून का उल्लंघन कर निर्माण करने वालों को और अधिक अवैध निर्माण की छूट दी जा रही है।
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बड़े बिल्डरों को ज्यादा फायदा
नई स्कीम से ग्रुप हाउसिंग या मल्टी स्टोरी आवासीय भवन निर्माण करने वालों के अलावा निजी भवन निर्माण करने वाले ऐसे लोगों को लाभ मिलता जो स्वीकृत मानत्रित के विपरीत अवैध तरीके से निर्माण कर लेते हैं। अभी तक एक्ट के तहत सीमित मात्रा में ही मानत्रित के विपरीत निर्माण को कंपाउडिंग शुल्क लेकर नियमित करने की अनुमति थी। मगर नई स्कीम में इस सीमा को काफी बढ़ा दिया गया है जिसे कोर्ट ने एक्ट के प्रावधानों के विपरीत करार देते हुए रोक दिया है।
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शाहजहांपुर के मेहर खान अंसारी की याचिका पर सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र ने इस मामले में अपर मुख्य सचिव शहरी विकास विभाग से 20 अक्तूबर तक हलफनामा दाखिल करने के लिए कहा है। कोर्ट ने कहा कि इस प्रकार की योजनाएं ऐसे ईमानदार नागरिकों को हताश करती हैं जो नियमों का पालन करते हुए निर्माण की अनुमति लेकर कानून के तहत निर्माण करते हैं। ऐसे लोगों को नियमों का सख्ती से पालन करने के लिए बाध्य भी किया जाता है। जबकि भवन निर्माण कानून का उल्लंघन कर निर्माण करने वालों को और अधिक अवैध निर्माण की छूट दी जा रही है।
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सुनियोजित विकास के उद्देश्य को होगा नुकसान
कोर्ट ने कहा कि यदि इस नियम को लागू करने की अनुमति दी गई तो अर्बन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट एक्ट के लक्ष्य और उद्देश्य दोनों को नुकसान होगा। सुनियोजित विकास से सिर्फ इस आधार पर समझौता नहीं किया जा सकता है कि अवैध निर्माणों में भारी मात्रा में प्राइवेट पूंजी का निवेश किया गया है। राज्य के अधिकारी ऐसी योजना नहीं बना सकते हैं जो एक्ट के प्रावधानों के विपरीत हो। कोर्ट ने कहा कि एक्ट की धारा 32 में कानून के तहत अवैध निर्माणों की कंपाउंडिंग करने का अधिकार है मगर इस अधिकार को खींच कर वहां तक ले जाने की अनुमति नहीं है जो एक्ट के दायरे से ही बाहर हो।
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यह था मामला
15 जूलाई 2020 को लागू न्यू कंपाउडिंग स्कीम लागू की गई। इसमें कहा गया कि अवैध निर्माणों में भारी प्राइवेट पूंजी का निवेश होता है जिसकी ध्वस्तीकरण करना न तो व्यवहारिक है और न ही मानवीय दृष्टि से उचित। इसलिए ऐसे अवैध निर्माणों को विशेष कंपाउडिंग योजना बनाकर नियमित किए जाने की आवश्यकता है। योजना के क्लाज चार में कहा गया है कि 300 वर्गगज के निर्माण में पहले अनुमन्य कंपाउडिंग के अतिरिक्त 20 प्रतिशत और अवैध निर्माण को कंपाउडिंग के दायरे में ला दिया गया, इसी तरह से रियर शेड बैक का पूरा अवैध निर्माण और फ्रंड का पचास प्रतिशत एरिया कंपाउडिंग के लिए स्वीकृत कर लिया गया। ग्रुप हाउसिंग में 15 प्रतिशत तक अतिरिक्त निर्माण की छूट, व्यवसायिक और मल्टी स्टोरी बिल्डिंग तथा अन्य बहुत से निर्माणों में बाई लॉज का उल्घंन कर किए गए अवैध निर्माणों को जिनकी कंपाउडिंग एक्ट में भी मान्य नहीं है इस नई स्कीम से कंपाउडिंग के दायरे में ला दिया गया।बड़े बिल्डरों को ज्यादा फायदा
नई स्कीम से ग्रुप हाउसिंग या मल्टी स्टोरी आवासीय भवन निर्माण करने वालों के अलावा निजी भवन निर्माण करने वाले ऐसे लोगों को लाभ मिलता जो स्वीकृत मानत्रित के विपरीत अवैध तरीके से निर्माण कर लेते हैं। अभी तक एक्ट के तहत सीमित मात्रा में ही मानत्रित के विपरीत निर्माण को कंपाउडिंग शुल्क लेकर नियमित करने की अनुमति थी। मगर नई स्कीम में इस सीमा को काफी बढ़ा दिया गया है जिसे कोर्ट ने एक्ट के प्रावधानों के विपरीत करार देते हुए रोक दिया है।