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HIgh Court : झांसी मेडिकल कॉलेज की मैट्रन के निलंबन पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक, सेवानिवृत्ति के दिन मिली राहत
Sat, 31 May 2025 04:56 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 31 May 2025 04:56 PM IST
सार
हाईस्कूल प्रमाणपत्र और सर्विस बुक में कूटरचना के आरोप में 15 दिन पहले निलंबित झांसी मेडिकल कॉलेज की मैट्रन नलिनी सूद को हाईकोर्ट से राहत मिल गई है। खास बात यह है कि 29 मई को ही नलिनी की सेवानिवृत्ति थी।
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अदालत का फैसला।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
हाईस्कूल प्रमाणपत्र और सर्विस बुक में कूटरचना के आरोप में 15 दिन पहले निलंबित झांसी मेडिकल कॉलेज की मैट्रन नलिनी सूद को हाईकोर्ट से राहत मिल गई है। खास बात यह है कि 29 मई को ही नलिनी की सेवानिवृत्ति थी और इसी दिन कोर्ट ने उनके निलंबन आदेश पर रोक लगा दी है। साथ ही सरकार से चार हफ्ते में जवाब तलब किया है, हलांकि विभागीय जांच जारी रहेगी। यह आदेश न्यायमूर्ति अजित कुमार की अदालत ने दिया है।
दरअसल, 14 मई को महानिदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य ने उन्हें निलंबित कर दिया था। यही नहीं झांसी के सीएमओ ने उनके खिलाफ नवाबाद थाने में एफआईआर भी दर्ज कराई है। आरोप है कि उन्होंने नियुक्ति के समय प्रस्तुत हाईस्कूल प्रमाणपत्र और सेवा पुस्तिका में ओवरराइटिंग करते हुए जन्मतिथि को 11 मई 1962 से बदलकर 11 मई 1965 करा दिया। इसकी सूचना विभाग या महानिदेशालय को नहीं दी गई।
निलंबन आदेश के खिलाफ नलिनी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि सेवा पुस्तिका और हाईस्कूल प्रमाणपत्र में दर्ज जन्मतिथि समान है। लिहाजा, दस्तावेजों में कूटरचना का आरोप गलत है। सुनवाई के बाद कोर्ट ने निलंबन आदेश के प्रभाव और संचालन पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। साथ ही स्पष्ट किया कि यह रोक विभागीय जांच पर कोई प्रभाव नहीं डालेगी। जांच जारी रहेगी और याची को सहयोग करना होगा। अब मामले की सुनवाई छह अगस्त को होगी।
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दरअसल, 14 मई को महानिदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य ने उन्हें निलंबित कर दिया था। यही नहीं झांसी के सीएमओ ने उनके खिलाफ नवाबाद थाने में एफआईआर भी दर्ज कराई है। आरोप है कि उन्होंने नियुक्ति के समय प्रस्तुत हाईस्कूल प्रमाणपत्र और सेवा पुस्तिका में ओवरराइटिंग करते हुए जन्मतिथि को 11 मई 1962 से बदलकर 11 मई 1965 करा दिया। इसकी सूचना विभाग या महानिदेशालय को नहीं दी गई।
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निलंबन आदेश के खिलाफ नलिनी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि सेवा पुस्तिका और हाईस्कूल प्रमाणपत्र में दर्ज जन्मतिथि समान है। लिहाजा, दस्तावेजों में कूटरचना का आरोप गलत है। सुनवाई के बाद कोर्ट ने निलंबन आदेश के प्रभाव और संचालन पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। साथ ही स्पष्ट किया कि यह रोक विभागीय जांच पर कोई प्रभाव नहीं डालेगी। जांच जारी रहेगी और याची को सहयोग करना होगा। अब मामले की सुनवाई छह अगस्त को होगी।
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