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High Court : वारिसों से स्टाम्प शुल्क की वसूली सिर्फ विरासत में मिली संपत्ति से, निजी संपत्ति से नहीं

Sun, 05 Apr 2026 01:35 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 05 Apr 2026 01:35 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि मृतक पर बकाया स्टाम्प शुल्क की वसूली उसके वारिसों की निजी संपत्ति से नहीं की जा सकती। स्टाम्प शुल्क की भरपाई वारिसों से केवल उसी सीमा तक की जाएगी, जितनी संपत्ति उन्हें मृतक से विरासत में मिली है।

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High Court: Stamp duty to be collected from heirs only on inherited property
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि मृतक पर बकाया स्टाम्प शुल्क की वसूली उसके वारिसों की निजी संपत्ति से नहीं की जा सकती। स्टाम्प शुल्क की भरपाई वारिसों से केवल उसी सीमा तक की जाएगी, जितनी संपत्ति उन्हें मृतक से विरासत में मिली है।

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इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की एकल पीठ ने आगरा निवासी राजकुमार वर्मा व एक अन्य की याचिका स्वीकार कर ली। मामला आगरा का है, जहां याचियों के पिता की 2020 में निष्पादित एक बैनामे में स्टाम्प कमी पाई गई थी। प्रशासन ने 16.55 लाख रुपये की वसूली का नोटिस जारी किया था। कार्यवाही के दौरान ही पिता की मृत्यु हो गई, जिसके बाद विभाग ने बेटों से वसूली की प्रक्रिया शुरू कर दी। याचियों ने दलील दी कि उन्होंने पिता से कोई संपत्ति विरासत में नहीं प्राप्त की है।
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लिहाजा, कोर्ट ने याचियों के खिलाफ जारी वसूली प्रमाणपत्र और उत्पीड़नात्मक कार्यवाही पर रोक लगा दी। साथ ही निर्देश दिया है कि वे अपने और पिता के इनकम टैक्स रिटर्न के साथ कलेक्टर आगरा के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज कराएं। वहीं, कलेक्टर को आदेश दिया है कि वे तथ्यों की गहन जांच करें और यह निर्धारित करें कि वारिसों को वास्तव में कितनी संपत्ति विरासत में मिली है।
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कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक जांच लंबित है, याची विरासत में मिली किसी भी संपत्ति को बेच या हस्तांतरित नहीं कर सकेंगे। कोर्ट ने अपने आदेश में यूपी राजस्व संहिता-2006 की धारा-181 का हवाला दिया। कहा कि कानून बकाया राजस्व की वसूली वारिसों से करने की अनुमति देता है, लेकिन इसमें एक स्पष्ट प्रतिबंध है। वारिसों को न तो हिरासत में लिया जा सकता है और न ही उनकी व्यक्तिगत अर्जित संपत्ति को मृतक के बकाये के लिए कुर्क किया जा सकता है। उनकी देनदारी केवल उनके पास आई विरासत तक ही सीमित है।

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