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High Court : विधायक पर जानलेवा हमले में मिली सात साल की सजा 41 साल बाद रद्द, बरी किया गया बिरजू
Thu, 15 Jan 2026 08:35 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 15 Jan 2026 08:35 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मथुरा के सादाबाद विधानसभा क्षेत्र के विधायक पर जानलेवा हमले में दोषी बिरजू को मिली सात साल की कैद की सजा को 41 साल बाद रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि आरोपी पहचान परेड ने हुई देरी से उपजे संदेह का लाभ पाने का हकदार है।
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अदालत।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मथुरा के सादाबाद विधानसभा क्षेत्र के विधायक पर जानलेवा हमले में दोषी बिरजू को मिली सात साल की कैद की सजा को 41 साल बाद रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि आरोपी पहचान परेड ने हुई देरी से उपजे संदेह का लाभ पाने का हकदार है। यह फैसला सुनाते हुए न्यायमूर्ति अब्दुल शाहिद की अदालत ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया।
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मामला 4 मार्च 1984 का है, जब तत्कालीन विधायक एमए खान अपने साथियों के साथ मथुरा से आगरा जा रहे थे। आरोप लगा कि रास्ते में बदमाशों ने वाहन रोककर फायरिंग की, जिसमें विधायक समेत तीन लोग घायल हुए। ट्रायल कोर्ट ने 1987 में बिरजू व आफत दर्जी को दोषी ठहराते हुए सात साल कैद की सजा सुनाई। इसके खिलाफ दोनों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अपील लंबित रहने के दौरान आफत दर्जी की मौत हो गई। जबकि कोर्ट ने बिरजू की अपील स्वीकार करते हुए उसे बेगुनाह करार दिया।
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अभियोजन की कहानी में छेद
1. संदेह के घेरे में पहचान
एफआईआर और गवाहों के बयान में अभियुक्तों के हुलिए का कोई जिक्र नहीं था। इसके बावजूद पहचान परेड काफी देर से कराई गई।
2. घायल गवाहों के विरोधाभाषी बयान
घायल गवाह (पीडब्लू-2) ने दावा किया कि शरद गुप्ता (पीडब्लू-4) को भी छर्रे लगे थे, जबकि शरद गुप्ता ने अदालत में स्पष्ट कहा कि उसे कोई चोट नहीं आई और न ही उसका मेडिकल परीक्षण कराया गया।
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3. आरोपी की भूमिका स्पष्ट नहीं
किसी भी कथित चश्मदीद ने यह नहीं बताया कि बिरजू ने गोली चलाई या घटना में उसकी वास्तविक और विशिष्ट भूमिका क्या थी।
4. घटना के मकसद स्पष्ट नहींकोर्ट ने पाया कि घटना के दौरान न तो कोई लूट हुई और न ही गवाहों ने अभियुक्त से पूर्व शत्रुता स्वीकार की। ऐसे में अभियोजन हमले के पीछे का कारण तक स्पष्ट नहीं कर सका।