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UP : हाईकोर्ट ने कहा- तुम्हें मर जाना चाहिए...घरेलू झगड़े की क्षणिक टिप्पणी, अपराध नहीं
Sun, 05 Oct 2025 04:47 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sun, 05 Oct 2025 04:47 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि घरेलू कलह व वैवाहिक मतभेद से उपजे झगड़े में तुम्हें मर जाना चाहिए कहना क्षणिक टिप्पणी है न कि आत्महत्या के लिए उकसाने का अपराध। पति-पत्नी के बीच झगड़ा सामान्य बात है।
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अदालत का आदेश
- फोटो : istock
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि घरेलू कलह व वैवाहिक मतभेद से उपजे झगड़े में तुम्हें मर जाना चाहिए कहना क्षणिक टिप्पणी है न कि आत्महत्या के लिए उकसाने का अपराध। पति-पत्नी के बीच झगड़ा सामान्य बात है। यह कृत्य अपराध तभी है जब सिद्ध हो कि मृतक के पास मौत के अलावा कोई रास्ता नहीं था। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति समीर जैन की अदालत ने औरैया निवासी मृतक की पत्नी रचना व उसके माता-पिता के खिलाफ दर्ज आपराधिक मुकदमा रद्द कर दिया।मामला दिबियापुर थाना क्षेत्र का है। याचियों पर आरोप था कि उन्होंने युवक से कहा कि उसे मर जाना चाहिए।
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कुछ समय बाद 13 नवंबर 2022 को रचना के पति ने आत्महत्या कर ली। सत्र न्यायालय ने याचियों के उन्मोचन प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया। उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि पति-पत्नी के बीच झगड़े सामान्य हैं। जानबूझकर उकसाने का ठोस प्रमाण नहीं है। वहीं, सरकार और शिकायतकर्ता के वकील ने इसे उत्पीड़न-अपमान का मामला बताते हुए अपराध की पुष्टि का दावा किया। कोर्ट ने पुनरीक्षण याचिका स्वीकार करते हुए सत्र अदालत के फैसले को रद्द करते हुए आरोपियों को बरी कर दिया।
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