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High Court : हथियार बरामदगी की वीडियोग्राफी पर कोर्ट संतुष्ट, 11 मई को होगी अगली सुनवाई

Fri, 17 Apr 2026 05:10 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 17 Apr 2026 05:10 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हत्या के मामले में इस्तेमाल हथियार बरामदगी की वीडियोग्राफी को लेकर पुलिस के स्पष्टीकरण पर संतोष जताया है, लेकिन जमानत अर्जी पर सुनवाई टालते हुए अगली तारीख 11 मई तय की।

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High Court satisfied with the videography of the seizure of weapons, next hearing will be on May 11
अदालत(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हत्या के मामले में इस्तेमाल हथियार बरामदगी की वीडियोग्राफी को लेकर पुलिस के स्पष्टीकरण पर संतोष जताया है, लेकिन जमानत अर्जी पर सुनवाई टालते हुए अगली तारीख 11 मई तय की। यह आदेश न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकल पीठ ने मयंक उर्फ ईशु बालिग की जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए दिया।

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मयंक के खिलाफ कानपुर देहात के बरौर थाने में हत्या के आरोप में एफआईआर दर्ज है। आरोपी पर बीमा की रकम हड़पने के लिए साजिश के तहत हत्या करने का आरोप है। बचाव पक्ष की ओर से दलील दी गई कि आरोपी को केवल संदेह के आधार पर फंसाया गया है। बरामदगी की प्रक्रिया में भी कानूनी प्रावधानों का पालन नहीं किया गया।
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मामले में आठ अप्रैल को कोर्ट ने बरामद हथौड़े की वीडियोग्राफी को लेकर सवाल उठाए थे। एसपी से एक साल में हथियारों की बरामदगी व उनकी वीडियोग्राफी का ब्योरा मांगा था। जांच अधिकारी ने शपथपत्र देकर बताया कि आरोपी की निशानदेही पर बरामद हथौड़े की वीडियोग्राफी मोबाइल से की गई थी। इस पर कोर्ट ने उनको व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दे दी।
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वहीं, एसपी ने भी शपथपत्र दाखिल कर बताया कि एक साल में 54 मामलों में 58 हथियार बरामद किए गए, जिनमें से 48 में वीडियोग्राफी कराई गई। जिन मामलों में ऐसा नहीं हुआ, उनमें संबंधित अधिकारियों के खिलाफ प्रारंभिक जांच के आदेश दिए गए हैं। सभी पुलिसकर्मियों को इस संबंध में प्रशिक्षण भी दिया गया है।

कोर्ट ने कहा कि बीएनएसएस की धारा-105 के तहत बरामदगी की वीडियोग्राफी अनिवार्य है। इसका सख्ती से पालन होना चाहिए। 

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा-105 के तहत जब्त वस्तुओं की सूची की तैयारी सहित संपूर्ण तलाशी और जब्ती प्रक्रिया को किसी भी ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से, विशेषकर मोबाइल फोन से रिकॉर्ड किया जाना चाहिए। यह रिकॉर्डिंग संबंधित मजिस्ट्रेट को भेजी जानी चाहिए।

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