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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   High Court said: Exemption in school fees given to siblings cannot be claimed as a right.

हाईकोर्ट ने कहा : भाई-बहनों को दी गई स्कूल फीस में छूट का दावा अधिकार के रूप में नहीं किया जा सकता

Thu, 01 Feb 2024 01:00 PM IST
विनोद सिंह अमर उजला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 01 Feb 2024 01:00 PM IST
सार

कोर्ट ने मामले में स्कूल से निष्कासित भाई-बहनों को फिर से स्कूल रोल पर बहाल करने और उन्हें शैक्षणिक सत्र 2024-2025 के लिए प्रवेश देने और याची यानी दोनों छात्रों के अभिभावक को स्कूल प्रबंधन के खिलाफ दर्ज शिकायत को वापस लेने का आदेश दिया।

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High Court said: Exemption in school fees given to siblings cannot be claimed as a right.
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि स्कूल द्वारा दी गई भाई-बहन की फीस में राहत कुछ शर्तों के अधीन है, अधिकार के रूप में इसका दावा नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने मामले में स्कूल से निष्कासित भाई-बहनों को फिर से स्कूल रोल पर बहाल करने और उन्हें शैक्षणिक सत्र 2024-2025 के लिए प्रवेश देने और याची यानी दोनों छात्रों के अभिभावक को स्कूल प्रबंधन के खिलाफ दर्ज शिकायत को वापस लेने का आदेश दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव ने गाजियाबाद के सत्येंद्र कुमार व दो अन्य की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया।

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मामले में याची एयरफोर्स के सेवानिवृत्त अफसर हैं। उनके दोनों बच्चों का प्रवेश डीपीएस राजनगर में हुआ था। स्कूल प्रशासन ने शैक्षणिक सत्र 2022-2023-2024 के लिए कोविड राहत और नियत तिथि के अंदर फीस जमा करने पर 50 फीसदी शुल्क में राहत देने की योजना लागू की। हालांकि, स्कूल प्रशासन ने यह शर्त लगाई कि शैक्षणिक सत्र 2023-24 या बच्चे की ओर से किसी भी अनुशासनात्मक दुर्व्यवहार के बाद योजना को वापस लेने का अधिकार सुरक्षित रखा है।

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याची अधिवक्ता ने दावा किया कि भाई-बहन की फीस और कोविड राहत शुल्क के बाद कटौती के बाद स्कूल की ओर से फीस के रूप में अतिरिक्त राशि की मांग की गई। याची की ओर से इसके खिलाफ आईजीआरएस पोर्टल और नियामक समिति के समक्ष भी शिकायत दर्ज की गई।

रेगुलेटरी कमेटी को दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराने पर एक लाख रुपये जुर्माना लगाया गया। इसके बाद स्कूल प्रबंधन ने निष्काषित कर दिया। स्कूल प्रबंधन की ओर से कहा गया कि याची की ओर से निर्धारित समय में शुल्क नहीं जमा किया। इसके अलावा अभिभावकों ने शिक्षकों के साथ दुर्व्यवहार किया था। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद दोनों पक्षों को सौहार्दपूर्ण ढंग से विवाद सुलझाने का आदेश दिया।

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