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हाईकोर्ट ने कहा : मजबूरी में उपस्थित न होने वाले कर्मचारी को कदाचार का दोषी नहीं ठहरा सकते

Sun, 29 Jun 2025 10:11 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 29 Jun 2025 10:11 AM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि मजबूर करने वाली परिस्थितियों के कारण यदि कोई कर्मचारी अनुपस्थित रहता है और वह अपना दायित्व पूरा नहीं कर पाता है तो उसे कदाचार का दोषी नहीं ठहरा सकते।

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High Court said An employee who is unable to attend due to compulsion cannot be held guilty of misconduct
अदालत(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि मजबूर करने वाली परिस्थितियों के कारण यदि कोई कर्मचारी अनुपस्थित रहता है और वह अपना दायित्व पूरा नहीं कर पाता है तो उसे कदाचार का दोषी नहीं ठहरा सकते। यह टिप्पणी करते हुए न्यायालय ने आगरा जिला सहकारी बैंक लिमिटेड के कर्मचारी की बर्खास्तगी को रद्द करते हुए उसे तत्काल सेवा में बहाल करने का आदेश दिया। साथ ही 50 प्रतिशत बकाया वेतन का भुगतान करने का निर्देश दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर की एकल पीठ ने विनोद कुमार मिश्रा की याचिका पर दिया।

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आगरा स्थित जिला सहकारी बैंक लिमिटेड में याची क्लर्क-सह-कैशियर के पद पर कार्यरत था। 5 सितंबर, 2021 को हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की ओर से एनडीपीएस एक्ट तहत एक आपराधिक मामले में गिरफ्तार कर लिया। याची को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया और 28 जून, 2024 को बरी होने तक उसे जेल में रहना पड़ा। इस अवधि के दौरान, बैंक अधिकारियों ने याची की अनुपस्थिति को अनाधिकृत मानते हुए अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू की।

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उन्हें ड्यूटी पर लौटने के लिए कई नोटिस भेजे गए और विभागीय जांच में भाग लेने के लिए भी कहा गया। याची जेल में होने के चलते उपस्थित नहीं हो पाया। याची के परिवार ने बैंक को उनकी गिरफ्तारी की सूचना दे दी थी। बैंक ने 28 दिसंबर 2023 को बिना सूचना अनुपस्थित रहने पर कदाचार का दोषी ठहराते हुए बर्खास्त कर दिया। जेल से छूटने के बाद याची ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी।

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न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के "कृष्णाकांत बी. परमार बनाम यूनियन ऑफ इंडिया" मामले का भी हवाला दिया, जिसमें यह माना गया था कि अनाधिकृत अनुपस्थिति को कदाचार तभी माना जा सकता है, जब यह जानबूझकर हो और मजबूर करने वाली परिस्थितियों का परिणाम न हो। अदालत ने कहा कि जिस अवधि के लिए याची पर अनाधिकृत अनुपस्थिति का आरोप लगाया गया था, उस पूरी अवधि में वह न्यायिक हिरासत में थे, इसलिए वह ड्यूटी पर उपस्थित होने की स्थिति में नहीं थे। कोर्ट ने 28 दिसंबर, 2023 के बर्खास्तगी आदेश को रद्द कर दिया।

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