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तीर्थपुरोहितों की याचिका हाईकोर्ट ने की खारिज, कहा- कुंभ धार्मिक आयोजन, यहां कोई वीआईपी नहीं
Fri, 04 Jan 2019 09:30 PM IST
देव कश्यप
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: देव कश्यप
Updated Fri, 04 Jan 2019 09:30 PM IST
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Allahabad High Court
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हाईकोर्ट ने कहा है कि कुंभ मेला एक धार्मिक आयोजन है। यहां आने वाले हर व्यक्ति को समान अधिकार प्राप्त है। यहां कोई वीआईपी नहीं है, इसलिए आवंटन नीति के तहत ही सभी को भूमि मिलनी चाहिए। कोर्ट ने तीर्थपुरोहितों की ओर से भूमि आवंटन को लेकर दाखिल याचिका खारिज कर दी है। घनश्याम शर्मा और नौ अन्य तीर्थपुरोहितों की याचिका पर न्यायमूर्ति भारती सप्रू और न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की पीठ ने सुनवाई की।
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याचिका में कहा गया कि तीर्थपुरोहितों की मेले में मुख्य भूमिका होती है। एक माह कल्पवास करने वालों के रहने और पूजा-पाठ की व्यवस्था तीर्थपुरोहित ही करते हैं, मगर मेला प्रशासन ने उनको जो भूमि आवंटित की है, वह उपयुक्त स्थान पर नहीं है। उनको बेहतर स्थान पर जमीन दी जानी चाहिए, ताकि कल्पवासियों को सुविधा हो। कोर्ट का कहना था कि मेले में भूमि आवंटन के लिए जो नीति बनी है, उसी के तहत भूमि दी जानी चाहिए। यहां कोई बड़ा या छोटा नहीं है।
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एक अन्य याचिका में न्यायमूर्ति शशिकांत गुप्ता और न्यायमूर्ति पीके श्रीवास्तव की खंडपीठ ने बजरंग दिव्य शक्ति सेवा संस्थान की याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से आठ जनवरी तक भूमि आवंटन नीति तलब की है। याची के अधिवक्ता का कहना था कि मेले में भूमि आवंटन में मनमानी की जा रही है। पहुंच वाले लोगों को संगम के नजदीक तथा आम आदमी और संस्थाओं को दूरदराज के क्षेत्र में अविकसित भूमि दी जा रही है, जहां सुविधाएं नहीं हैं। मेला प्रशासन भूमि आवंटन नीति का खुले आम उल्लंघन कर रहा है।
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