Allahabad High Court : हाईकोर्ट का बर्खास्त महिला बंदी रक्षक के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रोकने से इन्कार
यह आदेश न्यायमूर्ति राजबीर सिंह ने बर्खास्त बंदी रक्षक संयोग लता की निचली अदालत में चल रही आपराधिक कार्यवाही को चुनौती देने वाली याचिका पर दिया। याची पर फर्जी खेल प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी हासिल करने का आरोप है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2005 के बहुचर्चित जेल वार्डर भर्ती घोटाले में फर्जी खेल प्रमाण पत्र के जरिए नौकरी पाने वाली बंदी रक्षक के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही पर रोक लगाने से इन्कार कर दिया है। हालांकि, कोर्ट ने आवेदन के समय सरकारी सेवक न होने के कारण भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत चल रही कार्रवाई को रद्द कर दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति राजबीर सिंह ने बर्खास्त बंदी रक्षक संयोग लता की निचली अदालत में चल रही आपराधिक कार्यवाही को चुनौती देने वाली याचिका पर दिया। याची पर फर्जी खेल प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी हासिल करने का आरोप है। मामला फिरोजाबाद जिला जेल के लिए बंदी रक्षकों की भर्ती का है। नवंबर 2005 में आगरा केंद्रीय कारागार में यह भर्ती प्रक्रिया चली थी। शारीरिक दक्षता और लिखित परीक्षा में उत्तीर्ण 127 अभ्यर्थियों को मेरिट के आधार पर चयनित किया गया था।
भर्ती से वंचित अरविंद यादव समेत कुछ लोगों ने चयन समिति पर अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए शासन से शिकायत की थी। शासन ने 2007 में विजिलेंस जांच बैठाई। जांच में 18 बंदी रक्षकों के खेल प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए। यही नहीं, पांच अभ्यर्थियों के नंबर भी दोबारा बढ़ाए गए थे।
34 लोगों पर दर्ज कराई गई थी एफआईआर
विजिलेंस के सीओ बलधारी सिंह ने चयन समिति अध्यक्ष व आगरा केंद्रीय कारागार के तत्कालीन वरिष्ठ अधीक्षक अंबरीश गौड़, जिला जेल अधीक्षक आरएन पांडे, जेलर वीरेंद्र कुमार गुप्ता, जिला अस्पताल एटा के डॉ. नरेंद्र कुमार यादव, डिप्टी जेलर प्रमोद कुमार पांडे, विक्रम यादव, हिमांशु कुमार, वीरेंद्र कुमार त्रिवेदी, सेंट्रल जेल के चिकित्साधिकारी डॉ. देवेंद्र सिंह व डॉ. अतुल सारस्वत समेत 34 लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और साजिश की एफआईआर दर्ज कराई थी।
संयोग लता के खिलाफ आगरा की निचली अदालत ने तलबी आदेश जारी किया है। इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। दलील दी कि वह नौकरी के लिए आवेदन के समय सरकारी सेवक नहीं थी, इसलिए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत उन पर कार्रवाई अनुचित है। याची ने हाईकोर्ट में बर्खास्तगी को भी चुनौती दे रखी है, जिस पर निर्णय आना बाकी है। इसके बाद अदालत ने भ्रष्टाचार निवारण की कार्रवाई को रद्द करने का आदेश देते हुए याचिका निस्तारित कर दी।