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High Court : कानपुर रिंग रोड परियोजना में बदलाव से कोर्ट का इन्कार, सेंट्रल यूपी गैस लिमिटेड की याचिका खारिज
Sun, 31 May 2026 04:40 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sun, 31 May 2026 04:40 PM IST
सार
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचआई) की ओर से अधिवक्ता ने दलील दी कि परियोजना को 2022 में मंजूरी मिल चुकी थी। परियोजना का 50 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। इसलिए अब एलाइनमेंट बदलना संभव नहीं है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कानपुर रिंग रोड परियोजना में बदलाव से इन्कार कर दिया। न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति कुणाल रवि सिंह की खंडपीठ ने सेंट्रल यूपी गैस लिमिटेड (सीयूजीएल) की ओर से रास्ते में बदलाव की मांग को लेकर याचिका खारिज कर दी। कहा, राष्ट्रीय महत्व की अधोसंरचना परियोजना में निर्माण कार्य काफी आगे बढ़ चुका है। ऐसे में इस स्तर पर हस्तक्षेप उचित नहीं होगा।
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याचिका में कंपनी ने चकेरी स्थित एक प्लॉट पर बने सीएनजी मदर स्टेशन, पाइपलाइन और अन्य ढांचे को तोड़ने से रोकने की मांग की थी। कंपनी का कहना था कि यह स्टेशन 2011 से संचालित है। यहां से प्रतिदिन हजारों वाहनों को सीएनजी और आसपास के क्षेत्रों में पीएनजी की आपूर्ति की जाती है। छह अन्य डीबी स्टेशनों को भी यहीं से सप्लाई दी जाती है। कंपनी का आरोप था कि अधिग्रहण की प्रक्रिया के दौरान उसे कोई व्यक्तिगत नोटिस नहीं दिया गया और न ही उसकी मौजूदगी में कोई सर्वे कराया गया।
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राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचआई) की ओर से अधिवक्ता ने दलील दी कि परियोजना को 2022 में मंजूरी मिल चुकी थी। परियोजना का 50 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। इसलिए अब एलाइनमेंट बदलना संभव नहीं है।
कोर्ट ने कहा कि इतने उन्नत चरण में बदलाव करने से परियोजना में देरी होगी। सरकारी खर्च बढ़ेगा और अन्य प्रभावित लोगों के हित भी प्रभावित होंगे। सीयूजीएल को अधिग्रहण संबंधी अधिसूचनाओं पर पहले ही आपत्ति उठानी चाहिए थी। 2022 और 2023 में जारी अधिसूचनाओं के बावजूद कंपनी ने 2026 में जाकर पुनः एलाइनमेंट की मांग की, जो काफी विलंब से की गई कार्रवाई है।
हालांकि, कोर्ट ने एनएचआई से अपेक्षा जताई कि वह सार्वजनिक उपयोगिता सेवा को देखते हुए कंपनी को अपने ढांचे को अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने के लिए उचित समय देने पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करे।
कोर्ट ने कहा कि इतने उन्नत चरण में बदलाव करने से परियोजना में देरी होगी। सरकारी खर्च बढ़ेगा और अन्य प्रभावित लोगों के हित भी प्रभावित होंगे। सीयूजीएल को अधिग्रहण संबंधी अधिसूचनाओं पर पहले ही आपत्ति उठानी चाहिए थी। 2022 और 2023 में जारी अधिसूचनाओं के बावजूद कंपनी ने 2026 में जाकर पुनः एलाइनमेंट की मांग की, जो काफी विलंब से की गई कार्रवाई है।
हालांकि, कोर्ट ने एनएचआई से अपेक्षा जताई कि वह सार्वजनिक उपयोगिता सेवा को देखते हुए कंपनी को अपने ढांचे को अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने के लिए उचित समय देने पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करे।