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हाईकोर्ट : ट्रेडमार्क इस्तेमाल पर लगी रोक पर हस्तक्षेप से हाईकोर्ट का इन्कार, निचली अदालत के आदेश को बताया सही
Sun, 15 Oct 2023 04:25 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sun, 15 Oct 2023 04:25 PM IST
सार
कोर्ट ने निचली अदालत को निर्देश दिया कि वह 31 दिसंबर 2023 तक वाद के बिंदुओं को तय कर 31 मार्च 2025 तक वाद का निस्तारण करें। कोर्ट ने पक्षकारों से भी कहा है कि वे पूरा सहयोग करें। सुनवाई को बेवजह टाला न जाए।
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- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मेसर्स एमएमआई टोबैको कंपनी के मूसा का गुल ट्रेडमार्क के इस्तेमाल पर वाराणसी के सत्र न्यायालय द्वारा 21 सितंबर 2022 को जारी निषेधाज्ञा आदेश को बरकरार रखा है। कोर्ट ने कहा कि तथ्यों और साक्ष्यों को देखने के बाद सत्र न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।
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कोर्ट ने निचली अदालत को निर्देश दिया कि वह 31 दिसंबर 2023 तक वाद के बिंदुओं को तय कर 31 मार्च 2025 तक वाद का निस्तारण करें। कोर्ट ने पक्षकारों से भी कहा है कि वे पूरा सहयोग करें। सुनवाई को बेवजह टाला न जाए। अगर ऐसा होता है तो टलने वाली सुनवाई की तिथि पर 750 रुपये हर्जाना लगाया जाए। यह आदेश न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र ने सालिक मुख्तार व चार अन्य की याचिका को खारिज करते हुए दिया।
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मामले में प्रतिवादीगणों की ओर से वाराणसी के सत्र न्यायालय में मूसा का गुल ट्रेडमार्क के इस्तेमाल पर याचियों के खिलाफ वाद दाखिल किया गया है। सत्र न्यायालय ने तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए निषेधाज्ञा आदेश पारित कर ट्रेडमार्क के प्रयोग पर रोक लगा दी। सत्र न्यायालय ने अपने आदेश में कहा है कि याचियों की ओर से कंपनी के ट्रेडमार्क नाम का किसी भी तरह से उपयोग न किया जाए।
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याचियों ने सत्र न्यायालय के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी और तर्क दिया कि सत्र न्यायालय ने उनके तथ्यों और अभिलेखों का सही आकलन नहीं किया। इस वजह से सत्र न्यायालय द्वारा जारी निषेधाज्ञा आदेश सही नहीं है और उसे रद्द किया जाए। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला 26 सितंबर को सुरक्षित कर लिया था।