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यूपी: नोएडा श्रमिक आंदोलन मामले में हाईकोर्ट ने रद्द की छात्रा पर एनएसए की कार्रवाई, कहा- डीएम दें हर्जाना
Thu, 03 Sep 2026 03:10 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 03 Sep 2026 03:10 AM IST
सार
कोर्ट ने उनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत की गई निरुद्धि की कार्रवाई रद्द कर दी है। साथ ही उन्हें पांच लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह राशि गौतमबुद्ध नगर की डीएम और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों से वसूल की जाए।
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Allahabad High Court
- फोटो : एएनआई
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अधिकारों और मांगों के समर्थन में बिना हथियार शांतिपूर्ण ढंग से सार्वजनिक स्थान पर एकत्र होकर प्रदर्शन करना नागरिकों का सांविधानिक अधिकार है। प्रदर्शन से कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है, इस आशंका के आधार पर लोगों को अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने से नहीं रोका जा सकता।
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कोर्ट ने कहा कि शांतिपूर्ण और बिना हथियार के होने वाले प्रदर्शन को राज्य की ओर से केवल अनुमान या आशंका के आधार पर प्रतिबंधित करना संविधान में मिले सामूहिक अभिव्यक्ति के अधिकार को प्रभावित करेगा। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की खंडपीठ ने गौतमबुद्ध नगर की छात्रा आकृति चौधरी के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत की गई कार्यवाही रद्द कर दी।
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गौतमबुद्ध नगर में कम वेतन मिलने, लगातार 12 घंटे काम करने और 10-15,000 के बीच वेतन मिलने नाराज श्रमिकों ने आंदोलन किया था। इसमें तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाओं को अंजाम देने का आरोप है। घटना में याचिकाकर्ता को उकसाने वाला माना गया था। साथ ही विभिन्न आरोपों में प्राथमिकी दर्ज कर एनएसए के तहत भी कार्रवाई करते हुए आकृति को गिरफ्तार कर लिया गया था। याची ने इसे अवैध गिरफ्तारी बताते हुए बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की।
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कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई संदेश या वीडियो नहीं है, जिससे साबित हो कि आकृति ने लोगों को हिंसा, आगजनी या सार्वजनिक और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के लिए उकसाया था। कोर्ट ने एनएसए के तहत आकृति की लगातार हिरासत को अनुच्छेद-21 का उल्लंघन माना और तत्काल रिहाई का आदेश दिया, बशर्ते वह किसी अन्य मामले में वांछित न हों। साथ ही कोर्ट ने गौतमबुद्ध नगर के डीएम की ओर से पारित हिरासत आदेश को भी बिना पर्याप्त सामग्री और बिना उचित विचार के पारित किया गया माना। कोर्ट ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताते हुए आकृति को पांच लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। कहा है कि यह राशि डीएम और मामले में जिम्मेदार अन्य अधिकारियों के वेतन से वसूली जाए।