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High Court : मुआवजे के अत्यधिक भुगतान पर अधिकारियों के खिलाफ दायर जनहित याचिका खारिज
Sat, 07 Feb 2026 03:04 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 07 Feb 2026 03:04 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमीन के मुआवजे के मद में अत्यधिक भुगतान करने वाले अधिकारियों की जांच की मांग वाली जनहित याचिका खारिज कर दी है।
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अदालत(सांकेतिक)
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमीन के मुआवजे के मद में अत्यधिक भुगतान करने वाले अधिकारियों की जांच की मांग वाली जनहित याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि याचियों को पीड़ा अत्यधिक मुआवजे से नहीं, बल्कि इस बात से है कि विपक्षियों को मुआवजा मिला है। लिहाजा, जनहित याचिका पोषणीय नहीं है। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की अदालत ने आजमगढ़ निवासी अजय राय व चार अन्य की जनहित याचिका पर दिया है।
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मामला आजमगढ़ के माई खरगपुर गांव का है। याचियों ने आरोप लगाया कि अधिग्रहित आराजी संख्या 943 के मुआवजे के रूप में अधिकारियों ने सह खातेदारों को अत्यधिक मुआवजे का भुगतान किया है। मुआवजे का भुगतान करने वाले अधिकरियों की भूमिका की जांच की जानी चाहिए। साथ ही भुगतान की गई अतिरिक्त राशि की वसूली भी होनी चाहिए।
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सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि पूरी याचिका में बार-बार इस बात पर जोर दिया गया है कि मुआवजा केवल विपक्षी संख्या 8 से 13 को ही क्यों दिया गया और आराजी संख्या 943 के अन्य सह-खातेदारों को क्यों नहीं मिला। कोर्ट ने माना कि जनहित याचिका किसी खास को लाभ पहुंचने के लिए, किसी के इशारे पर दाखिल की गई है। इसके अलावा याची अपनी विधिक हैसियत साबित करने में भी विफल रहा।
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