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हाईकोर्ट : सात साल से कम सजा वाले अपराधों में गिरफ्तारी पर रोक, अवहेलना पर कानूनी कार्रवाई का निर्देश

Fri, 29 Jan 2021 08:40 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 29 Jan 2021 08:40 PM IST
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High Court: Prohibition of arrest in offenses under seven years, legal action against violation
allahabad high court - फोटो : social media
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि सात साल कम सजा वाले अपराधों में रूटीन तरीके से गिरफतारी नहीं करने के नियमों का सख्ती से पालन किया जाएगा। कोर्ट ने न्यायिक धार्मिकता को भी निर्देश दिया है कि गिरफ्तारी पर पुलिस रिपोर्ट पर संतुष्ट होने पर ही पुलिस रिमांड देने का आदेश दिया गया है। कोर्ट ने कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 41 (1) बी व 41 ए में सात साल से कम सजा वाले अपराधों में दोषय: गिरफ्तारी नहीं करने का नियम है।
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इसमें पॉनो का पालन करते हुए आवश्यक होने पर ही अभियुक्त की गिरफ्तारी करने का निर्देश दिया गया है। इस नियम का पालन सख्ती के साथ होना चाहिए। इसकी अनदेखी कर अभिभावक गिफ्तारी करने वाले पुलिस कर्मियों के खिलाफ हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना करने की कार्यवाही की जाएगी। कोर्ट ने कहा है कि पुलिस व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सामाजिक व्यवस्था के बीच संतुलन कायम करे। 
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कोर्ट ने प्रदेश के डीजीपी, विधि सचिव व महानगरीक को आदेश की प्रति व महान सभी पुलिस थानों के अनुपालनार्थ प्रेषक का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति डॉ। केजे टकर और न्यायमूर्ति गौतम चौधरी की खंडपीठ ने एटा के विमल कुमार व तीन अन्य की याचिका दी है। कोर्ट ने याची को अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल करने की छूट दी है। 
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मामला दहेज उत्पीड़न का है। आरोप है कि याची ने अपनी सगाई में साढे छह लाख रुपये दहेज लिया। इसके बाद क्रेटा कार की मांग पूरी होने पर ही शादी करने की शर्त रख दी, जिस पर कोतवाली नगर एटा में 28 नवंबर 2020 को दहेज उत्पीड़न की सनमिकी दर्ज कराई गई। पुलिस तब से याची को तलाश रही है।  

/ची का कहना था कि धारा 41 (1) बी की शर्तो व सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के तहत बिना ठोस कारण के सात साल से कम सजा वाले अपराधों के आरोपियों की रूटीन गिरफ्तारी नहीं की जा सकती है। इसके बावजूद पुलिस एफआईआर दर्ज होते ही कानूनी उपबंधों की अवहेलना करते हुए गिरफ्तारी करने के लिए दबिश देने लगती है, जो कानून के विपरीत है। 

इस धारा मे आरोपी को हाजिरी के लिए दो सप्ताह का नोटिस देने और साक्ष्य व पर्याप्त कारण होने पर ही गिरफ्तार करने का अधिकार है। राजस्थान पुलिस सात साल से कम सजा वाले अपराध के आरोपियों की दिनचर्या गिरफ्तारी नहीं कर सकती।


कोर्ट ने मजिस्ट्रेटों को भी रूटीन रिमांड न देने का निर्देश जारी किया है और कहा है कि बिना ठोस कारण के पुलिस की अभियुक्त को गिरफ्तार करने की रिपोर्ट जिला एवं सत्र न्यायाधीश के मार्फत महानगरक को भेजी जाए, ताकि मनमानी करने वाले पुलिस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई हो। की संभव हो रहा है। कोर्ट ने जिनान्यायाधीश को निर्देश दिया है कि प्रशासन के साथ मासिक बैठक में इसकी जानकारी दी जाए।
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