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High Court : झूठे वादे पर आधारित शारीरिक संबंधों को हमेशा दुष्कर्म नहीं माना जा सकता
Wed, 27 May 2026 07:53 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 27 May 2026 07:53 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि कोई शारीरिक संबंध आपसी सहमति से बनाए गए हैं तो केवल बाद में शादी से इन्कार कर देने या रिश्ता टूट जाने को दुष्कर्म के दायरे में नहीं लाया जा सकता है।
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अदालत
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि कोई शारीरिक संबंध आपसी सहमति से बनाए गए हैं तो केवल बाद में शादी से इन्कार कर देने या रिश्ता टूट जाने को दुष्कर्म के दायरे में नहीं लाया जा सकता है। न्यायमूर्ति मदन पाल सिंह की एकल पीठ ने मुरादाबाद के एक मामले में सुनवाई करते हुए ट्रायल कोर्ट की ओर से जारी समन और पूरी कार्यवाही निरस्त कर दी।
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पीड़िता ने कपिल सोम और एक अन्य पर शादी का झूठा वादा देकर संबंध बनाने, शोषण करने व जातिसूचक शब्दों के प्रयोग का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी। याची ने दर्ज एफआईआर की पूरी कार्यवाही रद्द करने की मांग में हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
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कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति को केवल तभी दोषी ठहराया जा सकता है, जब यह साबित हो कि आरोपी की शुरुआत से ही शादी करने की कोई मंशा नहीं थी। उसने केवल संबंध बनाने के लिए धोखाधड़ी का सहारा लिया था।
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