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हाईकोर्ट : अनुचित आदेश पर ही विशेष अपील करने की दी जा सकती है अनुमति
Fri, 04 Mar 2022 10:34 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 04 Mar 2022 10:34 PM IST
सार
मामला आजमगढ़ का है। निचली अदालत के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर करने के लिए मांगी गई थी अनुमति।अपील करने की विशेष अनुमति तभी दी जा सकती है जब प्रथम दृष्टया बरी करने का आदेश अनुचित हो।
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allahabad high court
- फोटो : social media
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि निचली अदालत के फैसले के खिलाफ विशेष अपील की अनुमति सीआरपीसी की धारा 378 के तहत तभी दी जा सकती है जब न्यायाधीश का बरी करने का विचार अनुचित हो।
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कोर्ट ने कहा कि दोषी व्यक्ति को उचित संदेह से परे अपराध स्थापित होने पर दंडित करना अदालत का कर्तव्य है और जब यह स्थापित नहीं होता है तो आरोपी को बरी करना भी कर्तव्य है। यह आदेश न्यायमूर्ति मोहम्मद ने हबीबी की याचिका को खारिज करते हुए दिया है।
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मामले में आजमगढ़ की हबीबा ने न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष इस आशय का आवेदन किया था कि उसकेपति और ससुराल वाले दहेज की मांग कर शारीरिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं। हबीबा के आवेदन को शिकायत के रूप में माना गया।
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मामले में सुनवाई के बाद निचली अदालत ने आरोपियों को बरी कर दिया। हबीबा ने निचली अदालत केफैसले को चुनौती देने केलिए जिला अदालत से स्वीकृति मांगी लेकिन जिला अदालत ने अपील दाखिल करने की स्वीकृति नहीं दी।
इस पर हबीबा ने हाईकोर्ट में सीआरपीसी की धारा 378 केतहत याचिका दाखिल कर निचली अदालत केफैसले को चुनौती देने के लिए स्वीकृति मांगी लेकिन हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद याचिका को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि निचली अदालत द्वारा बरी करने का आदेश न्यायोचित है। लिहाजा, उसने याचिका को खारिज कर दिया।