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हाईकोर्ट का आदेश : ग्राम न्यायालय व परिवार अदालत दोनों को गुजारा भत्ता मामले की सुनवाई का अधिकार

Sat, 11 Apr 2026 05:12 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 11 Apr 2026 05:12 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पत्नी, बच्चे व माता-पिता को भरण-पोषण दिलाने के वाद की सुनवाई का अधिकार परिवार अदालत व ग्राम न्यायालय दोनों को है।

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High Court order Both village court and family court have the right to hear maintenance allowance cases
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पत्नी, बच्चे व माता-पिता को भरण-पोषण दिलाने के वाद की सुनवाई का अधिकार परिवार अदालत व ग्राम न्यायालय दोनों को है। कोर्ट ने ग्राम न्यायालय करहल, मैनपुरी के न्यायाधिकारी को याची की आदेश निष्पादन अर्जी छह महीने में तय करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति अब्दुल शाहिद ने दामिनी की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है।

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याची की भरण-पोषण अर्जी को न्यायाधिकारी ने 30 नवंबर 2024 को तय कर दिया था। आदेश का पालन न होने पर याची ने निष्पादन अर्जी दाखिल की जो विचाराधीन है। शीघ्र निस्तारण के लिए याची ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर गुहार लगाई। कोर्ट ने कहा कि परिवार अदालत की तरह ग्राम न्यायालय को भी गुजारा भत्ता दिलाने की अर्जी की सुनवाई करने का अधिकार है। 

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