High Court : शुआट्स वीसी व निदेशक समेत अन्य आरोपियों को नहीं मिली राहत
कोर्ट ने कहा अग्रिम जमानत देने का अधिकार असामान्य स्थिति में न्याय हित में व न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग को रोकने के लिए किया जाता है। इनका अपराध समाज को प्रभावित करने वाला है। इसलिए राहत पाने के हकदार नहीं हैं।
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हिंदुओं को धोखे व लालच से ईसाई बनाने के आरोपी शुआट्स नैनी प्रयागराज के कुलपति विनोद बिहारी लाल, डायरेक्टर राजेंद्र बिहारी लाल, बाइबिल सेरेमनी प्रयागराज के बिशप मैथ्यू सैमुअल एवं ब्राडवेल क्रिश्चियन अस्पताल फतेहपुर के कैशियर सिख परमिंदर सिंह व अन्य को इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। कोर्ट ने इन सभी को अग्रिम जमानत पर रिहा करने से इन्कार कर दिया है।
कोर्ट ने कहा कि ये सभी शुआट्स के फंड घपले में भी ये आरोपी हैं। विवेचना अधिकारी ने फंड का इस्तेमाल धर्म परिवर्तन में इस्तेमाल करने सहित कई सुबूत एकत्र किए हैं। दोनों प्रभाव रखने वाले हैं। सामूहिक धर्म परिवर्तन कराने के आरोपी हैं। इसलिए इन्हें कुछ अभियुक्तों को मिली जमानत की समानता के अधिकार की मांग का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने कहा अपराध में अभियुक्त की भूमिका देखी जाएगी।
कोर्ट ने कहा अग्रिम जमानत देने का अधिकार असामान्य स्थिति में न्याय हित में व न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग को रोकने के लिए किया जाता है। इनका अपराध समाज को प्रभावित करने वाला है। इसलिए राहत पाने के हकदार नहीं हैं। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने अग्रिम जमानत अर्जी को खारिज करते हुए दिया है।
याचियों के खिलाफ कोतवाली फतेहपुर में धर्म परिवर्तन कराने के आरोप में एफ आई आर दर्ज कराई है। याचियों का कहना है कि वे ईसाइयत मानने वाले हैं। प्रदेश में जब से सरकार बदली है वर्ष 2017-18 में उनके खिलाफ 11 आपराधिक केस दर्ज हो गए। पिछले 35 साल तक कोई दाग नहीं रहा है। उन्हें फंसाया गया है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि इवेंजेनिकल चर्च ऑफ इंडिया हरिहरगंज, फतेहपुर ने फ्रॉड व धन के बल पर 90 हिंदुओं को ईसाई धर्म में परिवर्तित किया। फास्टर विजय मसीह से पूछताछ से पता चला कि पिछले 34 दिन से धर्म परिवर्तन का काम चल रहा है। जिसे 40 दिन चलना था। 35 लोगों सहित 20 अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है।