{"_id":"57c5ebd34f1c1b0b4b2cc4c5","slug":"high-court-news3","type":"story","status":"publish","title_hn":"आयोग के विशेषज्ञों की रिपोर्ट हाईकोर्ट ने खारिज की","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आयोग के विशेषज्ञों की रिपोर्ट हाईकोर्ट ने खारिज की
अमर उजाला ब्यूरो/ इलाहाबाद
Updated Wed, 31 Aug 2016 01:59 AM IST
विज्ञापन
अदालत का फैसला
पीसीएस प्री 2016 में गलत प्रश्न-उत्तर दिए जाने के मामले में हाईकोर्ट ने आयोग द्वारा प्रस्तुत विशेषज्ञ रिपोर्ट को अस्वीकार कर दिया है। कोर्ट ने याची और आयोग के अधिवक्ताओं से विशेषज्ञों के नाम मांगे हैं। दोनों पक्षों की सूची मिलने के बाद उनकी समिति गठित की जाएगी। यह समिति गलत उत्तरों पर अपनी राय देगी। याचिका पर अगली सुनवाई छह सितंबर को होगी।
प्रतियोगी छात्रों की याचिका पर न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता और न्यायमूर्ति एमके गुप्ता की खंडपीठ सुनवाई कर रही है। प्रतियोगी छात्रों का आरोप है कि पीसीएस प्री परीक्षा में पूछे गए 11 प्रश्नों के विकल्प स्वरूप दिए गए उत्तर गलत हैं। जिन लोगों ने प्रश्नों के गलत उत्तर दिए हैं उनको अंक मिल गए जबकि सही जवाब देने वालों के अंक कट गए। यदि प्रश्नों के सही उत्तर दिए गए होते तो याचीगण प्रारंभिक परीक्षा में सफल हो सकते थे। कोर्ट ने लोक सेवा आयोग को उन 11 प्रश्नों के सही उत्तर जानने के लिए विशेषज्ञ समिति बनाने और उसकी राय लेने का निर्देश दिया था। आयोग ने विशेषज्ञों की समिति गठित की मगर उस समिति में शामिल सदस्यों की योग्यता पर ही याचीगण ने सवाल उठा दिया। कोर्ट ने विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट को स्वीकार करने योग्य नहीं पाया। रिपोर्ट को खारिज करते हुए नए सिरे से विशेषज्ञ समिति गठित करने के लिए विशेषज्ञों के नाम मांगे हैं।
विज्ञापन
प्रतियोगी छात्रों की याचिका पर न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता और न्यायमूर्ति एमके गुप्ता की खंडपीठ सुनवाई कर रही है। प्रतियोगी छात्रों का आरोप है कि पीसीएस प्री परीक्षा में पूछे गए 11 प्रश्नों के विकल्प स्वरूप दिए गए उत्तर गलत हैं। जिन लोगों ने प्रश्नों के गलत उत्तर दिए हैं उनको अंक मिल गए जबकि सही जवाब देने वालों के अंक कट गए। यदि प्रश्नों के सही उत्तर दिए गए होते तो याचीगण प्रारंभिक परीक्षा में सफल हो सकते थे। कोर्ट ने लोक सेवा आयोग को उन 11 प्रश्नों के सही उत्तर जानने के लिए विशेषज्ञ समिति बनाने और उसकी राय लेने का निर्देश दिया था। आयोग ने विशेषज्ञों की समिति गठित की मगर उस समिति में शामिल सदस्यों की योग्यता पर ही याचीगण ने सवाल उठा दिया। कोर्ट ने विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट को स्वीकार करने योग्य नहीं पाया। रिपोर्ट को खारिज करते हुए नए सिरे से विशेषज्ञ समिति गठित करने के लिए विशेषज्ञों के नाम मांगे हैं।
विज्ञापन