फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   high court news

मिल मालिकों पर कार्रवाई क्यों नहीं कर रही सरकार: हाईकोर्ट

Thu, 17 Sep 2015 12:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Thu, 17 Sep 2015 12:00 AM IST
विज्ञापन
high court news
गन्ना किसानों का बकाया गन्ना मूल्य भुगतान नहीं होने पर हाईकोर्ट ने एक बार फिर प्रदेश सरकार को आड़े हाथ लेते हुए पूछा है कि सरकार ने मिल मालिकों के खिलाफ क्या कार्रवाई की है। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ एफआईआर दर्ज कर लेना और आरसी जारी कर देना ही पर्याप्त नहीं है। दोषी लोगों की गिरफ्तारी तथा उनकी संपत्ति जब्त करने जैसी कार्रवाई भी की जानी चाहिए थी। राष्ट्रीय किसान मजदूर यूनियन की जनहित याचिका पर सुनवाई रही मुख्य न्यायमूर्ति डॉ. डीवाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की खंडपीठ ने समयाभाव के कारण सुनवाई सोमवार के लिए टालते हुए प्रदेश सरकार को पूरी स्थिति से अवगत कराने का निर्देश दिया है।
विज्ञापन


याची संस्था के संयोजक वीएम सिंह ने सहकारी चीनी मिलों का मामला उठाते हुए बताया कि सहकारी मिलों पर 151 करोड़ रुपये अभी भी बकाया है, उन्होंने 290 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया है। शेष राशि केंद्र सरकार से पैकेज मिलने पर की भुगतान की जाएगी। सरकार चाहे तो किसानों का भुगतान कर सकती है। केंद्र से रकम मिलने पर उसकी भरपाई हो जाएगी। सहकारी मिलों के वकील अजय भनोट ने कहा कि सहकारी मिलों को भी रकम 15 प्रतिशत के ब्याज पर लेनी पड़ती है। मिलें किसानों की हैं, उनकी समिति इनका संचालन करती है। वीएम सिंह ने कहा कि सरकार सिर्फ भुगतान से बचने के लिए कह रही है कि मिलें उसकी नहीं हैं।
विज्ञापन


मुख्य स्थायी अधिवक्ता रमेश उपाध्याय ने बताया कि प्राइवेट मिलों पर अभी 4807 करोड़ रुपये बकाया है। उन्होंने 2650 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। 1167 करोड़ रुपये केंद्र सरकार से मिलने पर किसानों का 3650 करोड़ रुपये शेष रह जाएगा, जिसके भुगतान पर विचार किया जाएगा। वीएम सिंह का कहना था कि मिलों द्वारा दी गई रकम में से भी 2081 करोड़ रुपये राज्य सरकार ने दिया है। मिलों ने अपने पास से मुश्किल से 600 करोड़ रुपये से भी कम दिए हैं। उन्होंने कहा कि मिलें किसानों को गुमराह कर रही हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


वास्तविकता यह है कि मिलों ने बैंको से काफी ऋण लिया है। जितना भुगतान करना है उससे कहीं ज्यादा रुपये ले लिए हैं फिर भी किसानों को कुछ नहीं दिया। उदाहरण के लिए बजाज सुगर मिल ने 2949.50 करोड़ रुपये का गन्ना पेरा है। इसके  एवज में उसने 7111.34 करोड़ रुपये का बैंक से ऋण लिया है। सांभवी मिल ने 1137.3 करोड़ और बिरला ने 1510.49 करोड़ रुपये का लोन लिया है। मिलें लगभग दो हजार करोड़ रुपये का लोन बैंकों से ले चुकी हैं। कोर्ट ने प्रदेश सरकार से पूछा कि भुगतान न करने वाले मिल संचालकों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की गई है। मुख्य स्थायी अधिवक्ता ने कहा कि वह वीएम सिंह के हलफनामे का अध्ययन करने के बाद सोमवार को इस मसले पर जवाब देंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed