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high court news: इंटरमीडिएट के बाद किया गया डीएलएड प्रशिक्षण मान्य
Mon, 25 Jan 2021 08:24 PM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Mon, 25 Jan 2021 08:24 PM IST
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allahabad highcourt
- फोटो : prayagraj
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि इंटरमीडिएट के बाद किया गया डीएलएड प्रशिक्षण सहायक अध्यापक पद पर नियुक्ति के लिए मान्य है। कोर्ट ने ऐसी अर्हता रखने वाली सहायक अध्यापक को वेतन व एरियर के भुगतान का निर्देश दिया है। पूजा कुमारी की याचिका स्वीकार करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति अरविंद कुमार मिश्र प्रथम ने दिया है।
याची के अधिवक्ता सीमांत सिंह का कहना था कि याची 68500 सहायक अध्यापक के लिए चयनित हुई। चार सितंबर 2018 को उसे नियुक्ति पत्र दे दिया गया और उसने गोरखपुर में सहायक अध्यापक के पद पर ज्वाइन कर लिया।
मगर बीएसए गोरखपुर ने उसका वेतन इस आधार पर रोक दिया कि याची ने राजस्थान से इंटरमीडिएट के बाद दो वर्ष का डीएलएड प्रशिक्षण प्राप्त किया है। जबकि स्नातक के बाद दो वर्ष का प्रशिक्षण होना चाहिए। बीएसए ने इस संबंध में सचिव बेसिक शिक्षा को पत्र भेजा मगर उस पर कोई जवाब नहीं आया तो हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई।
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अधिवक्ता का कहना था कि एनसीटी द्वारा जारी 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना के अनुसार सहायक अध्यापक के लिए इंटरमीडिएट में पचास प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण और दो वर्षीय प्रशिक्षण चाहे वह किसी भी नाम से जाए आवश्यक है। याची ने डीएलएड के बाद स्नातक किया है। कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए याची को वेतन व एरियर भुगतान करने का निर्देश दिया है।
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याची के अधिवक्ता सीमांत सिंह का कहना था कि याची 68500 सहायक अध्यापक के लिए चयनित हुई। चार सितंबर 2018 को उसे नियुक्ति पत्र दे दिया गया और उसने गोरखपुर में सहायक अध्यापक के पद पर ज्वाइन कर लिया।
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मगर बीएसए गोरखपुर ने उसका वेतन इस आधार पर रोक दिया कि याची ने राजस्थान से इंटरमीडिएट के बाद दो वर्ष का डीएलएड प्रशिक्षण प्राप्त किया है। जबकि स्नातक के बाद दो वर्ष का प्रशिक्षण होना चाहिए। बीएसए ने इस संबंध में सचिव बेसिक शिक्षा को पत्र भेजा मगर उस पर कोई जवाब नहीं आया तो हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई।
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अधिवक्ता का कहना था कि एनसीटी द्वारा जारी 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना के अनुसार सहायक अध्यापक के लिए इंटरमीडिएट में पचास प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण और दो वर्षीय प्रशिक्षण चाहे वह किसी भी नाम से जाए आवश्यक है। याची ने डीएलएड के बाद स्नातक किया है। कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए याची को वेतन व एरियर भुगतान करने का निर्देश दिया है।