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हाईकोर्ट : आपराधिक मुकदमे की कार्यवाही में सीमित हस्तक्षेप ही संभव, गोवध कानून के तहत आपराधिक केस पर हस्तक्षेप से इंकार

Sat, 02 Oct 2021 08:22 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 02 Oct 2021 08:22 PM IST
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High Court: Limited interference in criminal proceedings is possible, refusing to interfere in criminal case under Cow Slaughter Act
court - फोटो : Social Media
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि आपराधिक केस कार्यवाही पर अपवाद स्वरूप सीमित दायरे में हस्तक्षेप किया जा सकता है। कोर्ट देखेगी कि अपराध कारित हुआ है या नहीं। कार्यवाही दुर्भावानापूर्ण तो नहीं, अपराध की सजा के लिए प्रथमदृष्टया साक्ष्य हैं या नहीं और आपराधिक कार्यवाही का उद्देश्य पूरा होगा या नहीं। कोर्ट ने कहा कि अंतर्निहित शक्तियों के इस्तेमाल का हाईकोर्ट को व्यापक अधिकार है। किॆतु इस्तेमाल न्याय हित में सावधानी पूर्वक किया जाना चाहिए।
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कोर्ट ने गोवध निरोधक कानून के तहत दाखिल आरोप पत्र का संज्ञान लेकर सम्मन जारी करने तथा प्रथमदृष्टया अपराध बनने के आधार पर दर्ज आपराधिक केस में हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया है और याचिका खारिज कर दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति शमीम अहमद ने इमामुद्दीन व दो अन्य की याचिका पर दिया है। याचियों के खिलाफ एसीजेएम अमरोहा की अदालत में आपराधिक केस चल रहा है, जिसे चुनौती दी गई थी।
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याचियों का कहना था कि गांव से छूरी, चाकू बरामद किया गया है। 10 किलो संदिग्ध मांस की बरामदगी दिखाई गई है, किन्तु फोरेंसिक जांच रिपोर्ट अभी तक नहीं आई है। पुलिस ने चार्जशीट दाखिल कर दी है। साक्ष्यों के आधार पर याचियों के खिलाफ केस नहीं बनता। इसलिए आपराधिक केस कार्यवाही रद्द की जाए।
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सरकारी वकील का कहना था कि पुलिस टीम अंबरपुर चौराहे पर थी तो सूचना मिली कि सिरसा खुमार के खेत में कुछ लोग गो वंश काटने जा रहे हैं। मौके पर पुलिस टीम ने मांस सहित अन्य सामान बरामद किया और गिरफ्तारी की। सैंपल फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। पुलिस ने साक्ष्य के आधार पर चार्जशीट दाखिल की है। आपराधिक केस बनता है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने हस्तक्षेप से इंकार कर दिया है।
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