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High Court: खाकी वर्दी कानून से ऊपर नहीं, अवैध कार्य में लिप्त व्यक्ति की भी गिरफ्तारी विधि सम्मत तरीके से हो

Mon, 08 Sep 2025 07:16 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 08 Sep 2025 07:16 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तल्ख लहजे में कहा कि खाकी वर्दी कानून से ऊपर नहीं है। यदि कोई व्यक्ति अवैध गतिविधियों में शामिल है तो भी उसकी गिरफ्तारी केवल विधि सम्मत तरीके से ही हो सकती है।

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High Court Khaki uniform is not above the law, even a person involved in illegal activities
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तल्ख लहजे में कहा कि खाकी वर्दी कानून से ऊपर नहीं है। यदि कोई व्यक्ति अवैध गतिविधियों में शामिल है तो भी उसकी गिरफ्तारी केवल विधि सम्मत तरीके से ही हो सकती है। अदालत ने यह मौखिक टिप्पणी अवैध धर्मांतरण के आरोपी 65 वर्षीय महमूद बेग की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई के दौरान की।

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न्यायमूर्ति सलिल कुमार राय और न्यायमूर्ति जफीर अहमद की खंडपीठ के समक्ष सोमवार को बरेली के एसएसपी अनुराग आर्या महमूद बेग को लेकर उपस्थित हुए। शपथपत्र देकर बताया कि बेग अवैध हिरासत में नहीं हैं। उन्हें एक पीड़ित के बयान के आधार पर अवैध धर्मांतरण के आरोप में सात सितंबर (रविवार) को गिरफ्तार किया गया है। इसके बाद मजिस्ट्रेट के आदेश पर पूछताछ के लिए हिरासत में रखा गया है।

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अपर शासकीय अधिवक्ता प्रथम परितोष मालवीय ने कोर्ट को बताया कि बेग को एक दृष्टिहीन पीड़िता का अवैध रूप से धर्मांतरण कराने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। उसे सात सितंबर को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। पुलिस उसे जेल से लाकर अदालत में पेश कर रही है। अपर शासकीय अधिवक्ता का कहना था कि पीड़िता की ओर से उसका नाम लिए जाने के बाद उसे गिरफ्तार किया गया। इस मामले में अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी पहले की गई थी, लेकिन बेग उस वक्त फरार हो गया था।
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याची के अधिवक्ता ने लगाए गंभीर आरोप

याची बेग की पत्नी परवीन अख्तर की ओर से पेश अधिवक्ता एहतेशाम अफसर खान ने दलील दी कि उन्हें 20 अगस्त की रात ही घर से उठा लिया गया था। सीसीटीवी फुटेज का हवाला देते हुए कहा गया कि रात 11:15 बजे तीन जीप में आए 11 लोग घर में घुसे और जब बेटे ने विरोध किया तो एक ने रिवॉल्वर उसके सीने पर तान दी। अधिवक्ता का आरोप है कि विशेष ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने बेग को अवैध हिरासत में रखा और यातनाएं दीं। साथ ही रिहाई के लिए एक लाख रुपये की मांग भी की गई। अधिवक्ता ने एसएसपी के हलफनामे का जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। अदालत ने इसे स्वीकार करते हुए सुनवाई स्थगित कर दी। अब अगली सुनवाई 22 सितंबर को होगी।

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