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High Court : बिना मर्जी युवती को करीब तीन साल तक बालगृह में रखना गैर-कानूनी, पीड़िता कार्रवाई के लिए स्वतंत्र
Thu, 17 Oct 2024 12:50 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 17 Oct 2024 12:50 PM IST
सार
मामला मऊ के मधुबन थाना क्षेत्र का है। बलिया निवासी युवती प्रेम विवाह के बाद पति संग हैदराबाद रह रही थी। सात महीने रहने के दौरान परिजनों ने पति के खिलाफ अपहरण का मुकदमा दर्ज करवा दिया। इसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया था।
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अदालत
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रेम विवाह करने वाली युवती को बेवजह बालगृह (बालिका), बलिया में दो वर्ष नौ माह तक हिरासत में रखने को गैर-कानूनी बताया। कहा कि अवैध हिरासत के लिए पीड़िता नियमानुसार कार्यवाही करने के लिए स्वतंत्र है। यह आदेश न्यायमूर्ति अरविंद सिंह सांगवान और न्यायमूर्ति मोहम्मद अजहर हुसैन इदरीसी की खंडपीठ ने मऊ निवासिनी युवती की ओर से दाखिल बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है।
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मामला मऊ के मधुबन थाना क्षेत्र का है। बलिया निवासी युवती प्रेम विवाह के बाद पति संग हैदराबाद रह रही थी। सात महीने रहने के दौरान परिजनों ने पति के खिलाफ अपहरण का मुकदमा दर्ज करवा दिया। इसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया था। तब से वह बाल गृह (बालिका), बलिया में बंद थी। अपनी रिहाई के लिए युवती ने हाईकोर्ट से गुहार लगाई थी।
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कोर्ट ने तीन अक्तूबर को बाल कल्याण समिति, मऊ के अध्यक्ष से पूछा था कि युवती को बाल गृह में दो वर्ष और नौ महीने तक क्यों रखा गया। इस पर अध्यक्ष ने हलफनामा दाखिल कर बताया कि बंदी नाबालिग थी। वह अपने माता-पिता संग जाने को तैयार नहीं थी। माता-पिता भी उसकी इच्छा के खिलाफ सुपुर्दगी नहीं लेना चाहते थे। हलांकि, अब उसे रिहा कर दिया गया है। बयान दर्ज होने के बाद वह पति संग रहेगी।
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कोर्ट ने हलफनामे में दिए गए स्पष्टीकरण से पर असंतुष्टी जताई। कहा कि युवती को बेवजह बाल गृह (बालिका), बलिया में दो वर्ष नौ माह तक हिरासत में रखना गैर कानूनी है। इसके लिए युवती नियमानुसार कार्यवाही करने को स्वतंत्र है।