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High Court : वकील को पेशेवर काम के लिए आपराधिक साजिश में फंसाना गलत, एफआईआर रद्द
Wed, 27 May 2026 07:45 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 27 May 2026 07:45 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी वकील को केवल अपने मुवक्किल की ओर से पेशेवर कार्य करने के लिए आपराधिक साजिश के मामले में आरोपी नहीं बनाया जा सकता।
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अदालत(सांकेतिक)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी वकील को केवल अपने मुवक्किल की ओर से पेशेवर कार्य करने के लिए आपराधिक साजिश के मामले में आरोपी नहीं बनाया जा सकता। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति जेजे मुनीर, न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने अधिवक्ता समर्पण जैन के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी, चार्जशीट और संज्ञान आदेश को रद्द कर दिया।
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याची के मुवक्किल ने जीएसटी से संबंधित सांविधिक अपील दाखिल करने के लिए उन्हें अपना अधिवक्ता नियुक्त किया था। अपील के दौरान अधिवक्ता ने कानून की अपनी समझ के आधार पर 10 प्रतिशत विवादित कर का प्री-डिपॉजिट इनपुट टैक्स क्रेडिट के माध्यम से जमा करने का कानूनी विकल्प चुना। हालांकि, बाद में जीएसटी अधिकारियों ने इसे गलत मान अपील खारिज कर दी। वकील के खिलाफ ही आपराधिक साजिश रचने का आरोप लगाते हुए कोतवाली थाने में एफआईआर दर्ज करा दी।
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याची ने मामले की कार्यवाही रद्द करने की मांग में याचिका दायर की। कोर्ट ने कहा कि किसी वकील को केवल पेशेवर कर्तव्य निभाने के लिए मुवक्किल के साथ साजिशकर्ता मान लिया जाएगा तो यह बार के अस्तित्व और कानूनी पेशे के लिए खतरा होगा।
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