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हाईकोर्ट सख्त: अदालतों के खिलाफ वकीलों के दुर्व्यवहार बर्दाश्त नहीं, कानपुर नगर के युवा अधिवक्ता ने मांगी माफी

Wed, 25 Sep 2024 07:01 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 25 Sep 2024 07:01 PM IST
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High Court is strict: Misbehavior of lawyers against courts will not be tolerated, young advocate of Kanpur
हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अदालतों के खिलाफ वकीलों के दुर्व्यवहार को कत्तई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। लिहाजा, वकीलों से अपेक्षा की जाती है कि वे न्यायाधीशों के खिलाफ असंयमित भाषा का प्रयोग करने से बचें। अपनी इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने क्षमा मांगने पर एक युवा अधिवक्ता के खिलाफ अवमानना कार्रवाई समाप्त कर दी। हलांकि, कोर्ट ने कानपुर नगर के जिला जज को अवमानना के आरोपी अधिवक्ता के आचरण को लेकर दो साल बाद रिपोर्ट हाईकोर्ट की रजिस्ट्री को सौंपने की भी आदेश दिया है।

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यह आदेश न्यायमूर्ति अश्विनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति डॉ. गौतम चौधरी की खंडपीठ ने सिविल जज कानपुर नगर की ओर से युवा अधिवक्ता याेगेंद्र त्रिवेदी के खिलाफ 4 फरवरी 2023 को भेजे गए संदर्भ पर सुनवाई करते हुए दिया है। आरोप है कि अधिवक्ता ने अदालती कार्यवाही के दौरान कोर्ट स्टाफ से एक फाइल छीन ली थी और ट्रायल जज के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। सिविल जज ने मामले की शिकायत जिला जज के जरिये हाईकोर्ट भेजी थी। कोर्ट ने अधिवक्ता के खिलाफ नोटिस जारी किया था।
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अधिवक्ता ने बिना शर्त अदालत से मांफी मांगी थी। हालांकि, हाईकोर्ट और सिविल जज माफी मांगने के तरीके से संतुष्ट नहीं थे। इसके बाद कोर्ट ने आरोपी अधिवक्ता को बेहतर हलफनामा दाखिल करने की माेहलत दी तो उन्होंने बिना शर्त माफी मांगी। इसके बाद कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी के साथ अधिवक्ता को अवमानना कार्यवाही से मुक्त की दिया। कहा कि हम इस मामले में अधिक गंभीर दृष्टिकोण अपनाते लेकिन आरोपी एक युवा अधिवक्ता है। इसके अलावा इससे पहले इस तरह के आचरण का कोई पूर्व आरोप नहीं है। इसलिए उन्हें सख्त चेतावनी के साथ बख्शा जा रहा है। लेकिन दूबारा ऐसा कोई कार्य संज्ञान में आया तो अदालत फिर से अवमानना कार्यवाही शुरू करेगी।

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