हाईकोर्ट : तस्करी के केस में फंसाने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई का निर्देश
कोर्ट ने कहा कि अभियोजना की पूरी कहानी संदेहों से भरी है। इसमें छेद ही छेद हैं। पुलिस याची को घर से रात में पकड़ कर ले जाती है उसके पास गांजा की बरामदगी दिखाती है। पकड़ने वाले पुलिसकर्मी सादे वेश में थे।
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आधी रात को घर से उठाकर गांजा तस्करी के केस में युवक को फंसा देने वाले पुलिस कर्मियों पर हाईकोर्ट ने कार्रवाई का आदेश दिया है। पुलिसकर्मियों पर आरोप है कि वह सांसी थानाक्षेत्र हाथरस निवासी ललित गुप्ता को आधी रात घर से पकड़ ले गए और उससे गांजा की बरामदगी दिखाकर झूठे केस में फंसा दिया। कोर्ट ने इस मामले में एसएसपी गौतमबुद्ध नगर को नोएडा के थाना फेज -2 के पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई करने के लिए कहा है। कोर्ट के आदेश की अवहेलना करने वाले तत्कालीन एसएसपी के खिलाफ भी कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने कहा कि अभियोजना की पूरी कहानी संदेहों से भरी है। इसमें छेद ही छेद हैं। पुलिस याची को घर से रात में पकड़ कर ले जाती है उसके पास गांजा की बरामदगी दिखाती है। पकड़ने वाले पुलिसकर्मी सादे वेश में थे। इस प्रकार की गिरफ्तारी दुर्भाग्यपूर्ण है। अपर महाधिवक्ता ने भी पुलिस कार्यवाही भारी खामियां स्वीकार की हैं। याची ललित गुप्ता की जमानत अर्जी पर यह आदेश न्यायमूर्ति राहुल चतुर्वेदी ने दिया। कोर्ट ने याची को जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया है।
इससे पूर्व अदालत ने इस मामले में पुलिस अधिकारियों को तलब किया था। कोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने वाले दरोगा राम चंद्र सिंह सहित इसमें शामिल रहे अन्य पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच करने के लिए कहा है। कहा है कि यदि जांच में पुलिसकर्मी दोषी पाए जाते हैं तो उन पर कार्रवाई की जाए।
घटना के मुताबिक नोएडा फेज दो थाने की पुलिस सादे वेश में हाथरस गई और याची को पकड़ लाई। 14 जून 21 को 29.600 किग्रा अवैध गांजा तस्करी के आरोप में उसकी गिरफ्तारी दिखाई गई। याची का कहना था कि उसके खिलाफ 2001 से 2017 तक हाथरस, सांसी थाने में 11 आपराधिक मामले दर्ज हैं। 2017 के बाद कोई केस दर्ज नहीं है। अब पुलिस ने फर्जी केस में फंसा दिया है। कोर्ट ने कहा याची अपने आचरण में सुधार कर रहा है जबकि और पुलिस झूठी कहानी गढ़ कर उसे फिर से अपराध में घसीटने की कोशिश कर रही है। जिसके लिए उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।