{"_id":"610aa62d1f2f0b733d53f4f6","slug":"high-court-instructed-dm-mau-amit-singh-bansal-to-follow-the-order","type":"story","status":"publish","title_hn":"चार सप्ताह में मुतवल्ली घोषित करने पर निर्णय लें या कोर्ट में हाजिर हों जिलाधिकारी मऊ - हाईकोर्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चार सप्ताह में मुतवल्ली घोषित करने पर निर्णय लें या कोर्ट में हाजिर हों जिलाधिकारी मऊ - हाईकोर्ट
Wed, 04 Aug 2021 08:07 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 04 Aug 2021 08:07 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी मऊ अमित सिंह बंसल को चार हफ्ते में आदेश का पालन करने या हाजिर होने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति प्रकाश पांडिया ने मोहम्मद हमीदुलहक की अवमानना याचिका पर दिया है।
विज्ञापन
कोर्ट
- फोटो : फाइल फोटो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी मऊ अमित सिंह बंसल को चार हफ्ते में आदेश का पालन करने या हाजिर होने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति प्रकाश पांडिया ने मोहम्मद हमीदुलहक की अवमानना याचिका पर दिया है। याची का कहना है कि कोर्ट ने एक दिसंबर 2020 के आदेश से जिलाधिकारी को सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड मदरसा शमशुल उलूम, घोसी का याची को मुतवल्ली घोषित करने पर निर्णय लेने का निर्देश दिया था।
जिसका पालन नहीं किया गया तो अवमानना याचिका दाखिल हुई। जिस पर कोर्ट ने आदेश पालन का अतिरिक्त समय दिया। इसके बावजूद आदेश का पालन नहीं किया गया तो दुबारा अवमानना याचिका दायर की गई है। कोर्ट ने कहा प्रथमदृष्टया अवमानना का केस बनता है और चार हफ्ते में अनुपालन हलफनामा मांगा है तथा नोटिस जारी कर कहा है कि आदेश का फिर भी पालन न किया तो कोर्ट में पेश हों।
विज्ञापन
जिसका पालन नहीं किया गया तो अवमानना याचिका दाखिल हुई। जिस पर कोर्ट ने आदेश पालन का अतिरिक्त समय दिया। इसके बावजूद आदेश का पालन नहीं किया गया तो दुबारा अवमानना याचिका दायर की गई है। कोर्ट ने कहा प्रथमदृष्टया अवमानना का केस बनता है और चार हफ्ते में अनुपालन हलफनामा मांगा है तथा नोटिस जारी कर कहा है कि आदेश का फिर भी पालन न किया तो कोर्ट में पेश हों।
विज्ञापन