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High Court : किसी मामले में दिन-प्रतिदिन सुनवाई का आदेश दिया जाए तो उसका अक्षरशः पालन हो
Sun, 01 Mar 2026 03:22 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sun, 01 Mar 2026 03:22 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी मामले में दिन-प्रतिदिन सुनवाई का आदेश दिया जाए तो उसका अक्षरशः पालन होना चाहिए। यह टिप्पणी करते हुए न्यायमूर्ति जेजे मुनीर की एकल पीठ ने आपराधिक मामले के ट्रायल में देरी पर नाराजगी जताई।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी मामले में दिन-प्रतिदिन सुनवाई का आदेश दिया जाए तो उसका अक्षरशः पालन होना चाहिए। यह टिप्पणी करते हुए न्यायमूर्ति जेजे मुनीर की एकल पीठ ने आपराधिक मामले के ट्रायल में देरी पर नाराजगी जताई। मामले में कानपुर नगर के पुलिस आयुक्त और जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) हाईकोर्ट में पेश हुए थे।
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आरोपी संजय सिंह परिहार उर्फ टिंकू की जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान अधिवक्ता ने दलील दी कि संबंधित आपराधिक मुकदमे का ट्रायल तीन साल से लंबित है। कोर्ट ने आरोपों की गंभीरता को देखते हुए पूर्व में जमानत से इन्कार किया था। मामले को दिन-प्रतिदिन के आधार पर चलाने का निर्देश दिया था। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने दलील दी कि अभियोजन पक्ष की ओर से बार-बार स्थगन मांगा जा रहा है। साथ ही दंड प्रक्रिया संहिता की धारा-311 के तहत पहले से परीक्षित गवाहों को पुनः बुलाने के लिए बार-बार आवेदन प्रस्तुत किए गए, जिससे मुकदमे की कार्यवाही अनावश्यक विलंब हुई।
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कोर्ट ने 25 फरवरी 2026 के आदेश में इस पर गंभीर आपत्ति जताई। कहा कि यह न्यायालय के आदेशों की अवहेलना है। इससे अभियुक्त की स्वतंत्रता भी प्रभावित हो रही है। इस पर कोर्ट ने पुलिस आयुक्त और जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया था, जिस पर दोनों अधिकारी न्यायालय में उपस्थित हुए।
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आदेश-पत्रक दिखाए जाने पर उन्होंने ट्रायल में देरी पर अपनी जिम्मेदारी स्वीकार की। कोर्ट ने कहा कि दिन-प्रतिदिन सुनवाई केवल औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना पुलिस प्रशासन और अभियोजन की जिम्मेदारी है कि गवाहों की उपस्थिति समय पर हो और मुकदमा अनावश्यक रूप से लंबित न रहे। स्पष्टीकरण के बाद न्यायालय ने दोनों अधिकारियों की व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दे दी। साथ ही ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि वह मामले की अद्यतन स्थिति रिपोर्ट 12 मार्च तक प्रस्तुत करें।