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हाईकोर्ट : हाईकोर्ट ने रद्द की अपहरणकर्ताओं की उम्रकैद की सजा, बच्चे का अपहरण कर मांगी थी दो करोड़ की फिरौती

Sat, 23 Mar 2024 12:33 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 23 Mar 2024 12:33 PM IST
सार

18 अक्तूबर 2011 को गाजियाबाद के अमित जैन के कक्षा दो में पढ़ने वाले बेटे का अपहरण कर दो करोड़ रुपये फिरौती मांगी गई थी। पुलिस ने जांच-पड़ताल करते हुए मुखबिर की सूचना पर मुठभेड़ में छह आरोपियों को पकड़ते हुए बच्चे को बरामद कर लिया था।

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High Court: High Court canceled the life imprisonment of the kidnappers
अदालत। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजियाबाद में बच्चे के अपहरण के दाेषियों की उम्रकैद की सजा रद्द कर दी है। कोर्ट ने अन्य मामलों में दी गई सजा को बरकरार रखते हुए सात साल की सजा सुनाई। हाईकोर्ट ने कहा कि सजा अपराध के अनुरूप होनी चाहिए। अभियोजन पक्ष फिरौती मांगने और बच्चे की मृत्यु या चोट पहुंचाने का कोई खतरा साबित नहीं कर पाया। यह फैसला न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा, न्यायमूर्ति अनीश कुमार गुप्ता की कोर्ट ने सुनाया।

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18 अक्तूबर 2011 को गाजियाबाद के अमित जैन के कक्षा दो में पढ़ने वाले बेटे का अपहरण कर दो करोड़ रुपये फिरौती मांगी गई थी। पुलिस ने जांच-पड़ताल करते हुए मुखबिर की सूचना पर मुठभेड़ में छह आरोपियों को पकड़ते हुए बच्चे को बरामद कर लिया था। पुलिस ने ललित कुमार, पप्पू, राजकुमार, कन्हैया, इकबाल और शिवराम को मौके से पकड़ा था। जबकि, आरोपियों के दो साथी कय्यूम व जॉनी उर्फ बाबा मौके से भाग गए थे। पुलिस ने अपहरण, आर्म्स एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था।
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ट्रायल कोर्ट ने ललित कुमार, पप्पू, राजकुमार, कन्हैया, शिवराम, इकबाल को दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। ट्रायल कोर्ट के फैसले के विरोध में हाईकोर्ट में अपील दायर की गई। कोर्ट ने सुनवाई करते हुए दोषियों को उम्रकैद से बरी करते हुए सात साल की सजा सुनाई। अन्य मामलों की सजा ट्रायल कोर्ट के आदेश के अनुसार साथ-साथ चलेंगी। अपीलकर्ता पहले ही 10 साल से की सजा काट चुके हैं। ऐसे में तुरंत रिहा करने का आदेश दिया।

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