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UP: हाईकोर्ट ने अपनाया सख्त रुख... फर्रुखाबाद की एसपी को वकील की रिहाई तक अदालत में बिठाया, पढ़ें पूरा मामला

Wed, 15 Oct 2025 04:55 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विजय पुंडीर Updated Wed, 15 Oct 2025 04:55 AM IST
सार

हाईकोर्ट ने फर्रुखाबाद की पुलिस अधीक्षक (एसपी) आरती सिंह की कार्यप्रणाली को न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने वाला बताया। एसपी से नाराज जस्टिस जेजे मुनीर व जस्टिस संजीव कुमार की खंडपीठ ने उन्हें कोर्ट हिरासत में लेने का आदेश दिया। आगे पढ़ें क्या है पूरा मामला...

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High Court has made the SP of Farrukhabad sit in the court till the release of the lawyer
फर्रुखाबाद की एसपी को हाईकोर्ट ने वकील की रिहाई तक अदालत में बिठाया - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर करने वाले याचिकाकर्ता को धमकाने और वकील को गिरफ्तार कराने के आरोप में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए फर्रुखाबाद की पुलिस अधीक्षक (एसपी) आरती सिंह को अदालत में तब तक बिठाए रखा, जब तक कि वकील रिहा नहीं हो गए। मामले की सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आने पर एसपी से नाराज जस्टिस जेजे मुनीर व जस्टिस संजीव कुमार की खंडपीठ ने उन्हें कोर्ट हिरासत में लेने का आदेश दिया। पीठ की टिप्पणी मौखिक थी। इस पर महाधिवक्ता ने मोहलत मांग ली।

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यूपी सरकार ने हाईकोर्ट से पक्ष रखने का आग्रह किया, जिस पर मंगलवार दोपहर करीब 3:45 बजे कोर्ट में सुनवाई हुई। बाद में, कोर्ट ने सिंह को बुधवार तक व्यक्तिगत हलफनामा दायर करने का समय दिया एवं सिंह और उनकी पूरी टीम को व्यक्तिगत रूप से सुनवाई में मौजूद रहने का आदेश दिया। खंडपीठ ने यह आदेश फर्रुखाबाद निवासी प्रीति यादव की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर दिया।

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याचिका में प्रीति यादव ने आरोप लगाया कि आठ सितंबर की रात नौ बजे थाना प्रभारी अनुराग मिश्रा, सीओ समेत चार-पांच पुलिसकर्मी उनके घर में घुस आए और दो सदस्यों को हिरासत में ले लिया। दोनों को करीब एक सप्ताह तक हिरासत में रखा। इस दौरान याची से लिखित बयान लिया गया कि वह पुलिस के खिलाफ किसी तरह की शिकायत नहीं करेगी। यादव से बाद में यह भी लिखवाया कि उन्होंने कोई याचिका दाखिल नहीं की है। सुनवाई के दौरान पुलिस की ओर से प्रीति का यह लिखित बयान पेश किया गया, तो कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए 14 अक्तूबर को अफसरों के हलफनामे के साथ ही याची प्रीति यादव को तलब किया।

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कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई के दौरान एसपी सहित अन्य पुलिसकर्मी हाजिर हुए। इस दौरान प्रीति भी हाजिर हुईं और उन्होंने बयान दर्ज कराया। प्रीति से कोर्ट ने पूछा, क्या उन्होंने याचिका दायर की है, तो उन्होंने हां में उत्तर दिया। यह पूछे जाने पर कि याचिका वापस लेने के लिए क्यों कहा, उन्होंने बताया कि पुलिस वाले पति को पकड़ ले गए थे।

एसपी की कार्यप्रणाली न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने वाली
हाईकोर्ट ने एसपी की कार्यप्रणाली को न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने वाला बताया। हालांकि, एसपी आरती की मौजूदगी में राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता ने बुधवार को दोपहर 12 बजे सुनवाई की प्रार्थना की, ताकि सिंह हलफनामा दायर कर सकें। सुनवाई के लिए कोर्ट ने बुधवार की तिथि तय कर दी।

डीजीपी को भी रोका था
हाईकोर्ट 15 सितंबर, 2021 को तत्कालीन डीजीपी मुकुल गोयल को भी जवाब दाखिल होने तक एक दिन प्रयागराज में रोक चुका है। मैनपुरी पुलिस पर कार्रवाई न करने पर तत्कालीन कार्यकारी चीफ जस्टिस एमएन भंडारी और जस्टिस एके ओझा की खंडपीठ ने यह आदेश दिया था।

वकील के घर तोड़फोड़ भी की गई
हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अमरेंद्र नाथ सिंह ने बताया, पुलिस को आशंका थी कि फर्रुखाबाद के वकील अवधेश मिश्र ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल कराई है। इससे नाराज पुलिस कर्मियों ने 11 अक्तूबर को अधिवक्ता के घर पर धावा बोल दिया और तोड़फोड़ की। इस संबंध में  कोर्ट में अर्जी पेश की गई। इससे नाराज पुलिस ने अवधेश मिश्र को मंगलवार को सुनवाई के बाद कोर्ट के बाहर से गैरकानूनी तरीके से हिरासत में ले लिया।

सुनवाई के बाद हाईकोर्ट को बताया गया कि एसपी के आदेश पर अदालत के बाहर से अधिवक्ता अवधेश मिश्र व उनके बेटे कृष्णा मिश्र को पुलिस ने हिरासत में ले लिया और उन्हें फर्रुखाबाद ले जा रही है। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताई और 3:45 बजे एसपी आरती सिंह एवं उनकी टीम को तलब किया। उनके पेश होने पर कोर्ट ने फटकार लगाते हुए स्पष्टीकरण मांगा।

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