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UP : हाईकोर्ट सख्त- छह साल बाद याचिका वापस लेने पर बीएसए से मांगा व्यक्तिगत हलफनामा

Thu, 27 Aug 2026 03:08 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 27 Aug 2026 03:08 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लंबित याचिका को छह साल बाद अचानक वापस लिए जाने और शिकायत के निस्तारण का कोई दस्तावेज रिकॉर्ड पर पेश नहीं किए जाने को गंभीरता से लिया है।

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High Court gets tough – seeks personal affidavit from BSA over withdrawal of petition after six years.
कोर्ट का आदेश। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लंबित याचिका को छह साल बाद अचानक वापस लिए जाने और शिकायत के निस्तारण का कोई दस्तावेज रिकॉर्ड पर पेश नहीं किए जाने को गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने प्रयागराज के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट करने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकल पीठ ने उपकार कुशवाहा की याचिका पर दिया है।

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याची ने बेसिक शिक्षा अधिकारी के 25 फरवरी 2018 को पारित आदेश को चुनौती दी गई थी। याची ने जूनियर बेसिक स्कूल में सहायक अध्यापक के रूप में कार्य करने पर रोक लगाने और नियमित वेतन दिलाने की मांग की थी। कोर्ट ने वर्ष 2019 को बीएसए के विवादित आदेश के संचालन पर अगले आदेश तक रोक लगा दी थी। इसके बाद मामला लंबित रहा और करीब छह वर्ष बीतने के बाद याची के अधिवक्ता ने यह कहते हुए याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी कि उसकी शिकायत का समाधान हो गया है।

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इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि यह स्पष्ट नहीं किया गया कि शिकायत किस तरह और किस आदेश या कार्रवाई से निस्तारित हुई। न तो विवादित आदेश वापस लेने, संशोधित करने या निष्प्रभावी करने का कोई दस्तावेज रिकॉर्ड पर रखा गया और न ही निस्तारण की परिस्थितियां बताई गईं। हाईकोर्ट ने बीएसए से यह भी बताने को कहा है कि शिकायत किस प्रकार निस्तारित हुई और किस अधिकारी ने की तथा उससे संबंधित आदेश की प्रति रिकॉर्ड पर क्यों नहीं रखी गई। 

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