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प्रवेश लेने गए छात्र की पिटाई पर हाईकोर्ट गंभीर
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High Court Gambling on Beating Students
कानपुर (औरैया) के ध्यानार्थ
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दाखिला लेने गए छात्र की पिटाई पर हाईकोर्ट सख्त
0 कॉलेज का मैनेजर कोर्ट में तलब, रजिस्ट्रार शाहू जी महराज विवि को जांच का आदेश, एसपी औरैया से रिपोर्ट तलब
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। एलएलबी कोर्स में दाखिला लेने गए छात्र की कॉलेज मैनेजर द्वारा पिटाई करवाने के मामले में हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने न सिर्फ दाखिला देने से इंकार करने के मामले में कॉलेज के मैनेजर को तलब किया है, बल्कि मामले की जांच छत्रपति शाहू जी महराज विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार को करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने एसएसपी औरैया से छात्र की शिकायत पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है। मामला औरैया के जीएस लॉ कॉलेज का है। कॉलेज शाहूजी महराज विवि से संबद्ध है। पीड़ित छात्र ब्रह्मदत्त की याचिका पर न्यायमूर्ति अजय भनोट सुनवाई कर रहे हैं।
याचिका पर अधिवक्ता विनय कुमार पांडेय ने पक्ष रखा। याची का कहना है कि कॉलेज ने उसे एलएलबी कोर्स में यह कहते हुए दाखिला देने से इंकार कर दिया कि उसके पास बीटेक की डिग्री है और बीटेक एलएलबी दाखिले में मान्य नहीं है। कोर्ट ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए कॉलेज और विश्वविद्यालय से जवाब मांगा था। याची का कहना है कि जब वह हाईकोर्ट के आदेश की प्रति रिसीव कराने कॉलेज गया तो मैनेजर के गुंडों से उसकी पिटाई की। इसकी शिकायत उसने पुलिस से भी की है।
दाखिले के मामले में कॉलेज का कहना था कि उसने दाखिला देने से इंकार नहीं किया। विश्वविद्यालय ने दाखिले की अनुमति नहीं दी। जबकि विश्वविद्यालय का कहना था कि बीटेक डिग्री धारक के एलएलबी कोर्स में दाखिले पर कोई रोक नहीं है। कई बीटेक डिग्री धारकों को कोर्स में दाखिला दिया गया है। विश्वविद्यालय कॉलेज द्वारा आवेदन और फीस ले लेने के बाद ही एनरोलमेंट नंबर एलाट करता है, इसलिए उसके दाखिले से इंकार करने का कोई औचित्य नहीं है।
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कोर्ट ने कहा कि इससे लगता है कि कॉलेज ने हाईकोर्ट में झूठा हलफनामा दाखिल कर अदालत को गुमराह करने की कोशिश की है। प्रबंधक रंजीत प्रताप सिंह राजवत को अगली सुनवाई पर तलब किया है। उनको मैनेजर पद पर अपनी नियुक्ति से संबंधित दस्तावेज भी दिखाने का निर्देश दिया है। छात्र की पिटाई को गंभीर मामला मानते हुए कोर्ट ने कहा कि एक भावी छात्र की गुंडों से पिटाई करवाना गंभीर मामला है। यदि आरोप सही पाए गए तो दोषी व्यक्ति को कानून का जिम्मेदार ठहराना होगा। याचिका पर अगली सुनवाई 31 जुलाई को होगी।
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दाखिला लेने गए छात्र की पिटाई पर हाईकोर्ट सख्त
0 कॉलेज का मैनेजर कोर्ट में तलब, रजिस्ट्रार शाहू जी महराज विवि को जांच का आदेश, एसपी औरैया से रिपोर्ट तलब
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। एलएलबी कोर्स में दाखिला लेने गए छात्र की कॉलेज मैनेजर द्वारा पिटाई करवाने के मामले में हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने न सिर्फ दाखिला देने से इंकार करने के मामले में कॉलेज के मैनेजर को तलब किया है, बल्कि मामले की जांच छत्रपति शाहू जी महराज विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार को करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने एसएसपी औरैया से छात्र की शिकायत पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है। मामला औरैया के जीएस लॉ कॉलेज का है। कॉलेज शाहूजी महराज विवि से संबद्ध है। पीड़ित छात्र ब्रह्मदत्त की याचिका पर न्यायमूर्ति अजय भनोट सुनवाई कर रहे हैं।
याचिका पर अधिवक्ता विनय कुमार पांडेय ने पक्ष रखा। याची का कहना है कि कॉलेज ने उसे एलएलबी कोर्स में यह कहते हुए दाखिला देने से इंकार कर दिया कि उसके पास बीटेक की डिग्री है और बीटेक एलएलबी दाखिले में मान्य नहीं है। कोर्ट ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए कॉलेज और विश्वविद्यालय से जवाब मांगा था। याची का कहना है कि जब वह हाईकोर्ट के आदेश की प्रति रिसीव कराने कॉलेज गया तो मैनेजर के गुंडों से उसकी पिटाई की। इसकी शिकायत उसने पुलिस से भी की है।
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दाखिले के मामले में कॉलेज का कहना था कि उसने दाखिला देने से इंकार नहीं किया। विश्वविद्यालय ने दाखिले की अनुमति नहीं दी। जबकि विश्वविद्यालय का कहना था कि बीटेक डिग्री धारक के एलएलबी कोर्स में दाखिले पर कोई रोक नहीं है। कई बीटेक डिग्री धारकों को कोर्स में दाखिला दिया गया है। विश्वविद्यालय कॉलेज द्वारा आवेदन और फीस ले लेने के बाद ही एनरोलमेंट नंबर एलाट करता है, इसलिए उसके दाखिले से इंकार करने का कोई औचित्य नहीं है।
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कोर्ट ने कहा कि इससे लगता है कि कॉलेज ने हाईकोर्ट में झूठा हलफनामा दाखिल कर अदालत को गुमराह करने की कोशिश की है। प्रबंधक रंजीत प्रताप सिंह राजवत को अगली सुनवाई पर तलब किया है। उनको मैनेजर पद पर अपनी नियुक्ति से संबंधित दस्तावेज भी दिखाने का निर्देश दिया है। छात्र की पिटाई को गंभीर मामला मानते हुए कोर्ट ने कहा कि एक भावी छात्र की गुंडों से पिटाई करवाना गंभीर मामला है। यदि आरोप सही पाए गए तो दोषी व्यक्ति को कानून का जिम्मेदार ठहराना होगा। याचिका पर अगली सुनवाई 31 जुलाई को होगी।