{"_id":"69edd6c8e3bcae6e490ddebe","slug":"high-court-filing-of-attached-property-under-gangster-act-cannot-be-rejected-court-imposed-stay-2026-04-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"High Court : गैंगस्टर एक्ट में अटैच संपत्ति दाखिल खारिज नहीं हो सकती, कोर्ट ने लगाई रोक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
High Court : गैंगस्टर एक्ट में अटैच संपत्ति दाखिल खारिज नहीं हो सकती, कोर्ट ने लगाई रोक
Sun, 26 Apr 2026 02:41 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sun, 26 Apr 2026 02:41 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि गैंगस्टर एक्ट के तहत जिला मजिस्ट्रेट के आदेश से अटैच की गई संपत्ति दाखिल-खारिज नहीं की जा सकती है।
विज्ञापन
इलाहाबाद हाईकोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि गैंगस्टर एक्ट के तहत जिला मजिस्ट्रेट के आदेश से अटैच की गई संपत्ति दाखिल-खारिज नहीं की जा सकती है। यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने उदय सिंह की याचिका पर दिया है।
विज्ञापन
झांसी निवासी प्रतिवादी संजय यादव ने 28 अगस्त 2024 को जिला मजिस्ट्रेट झांसी की ओर संपत्ति को अटैच करने के आदेश से पहले जून 2024 में जमीन अरविंद सिंह को बेच दी थी। हालांकि, आदेश प्रभावी होने के बावजूद तहसीलदार बबीना ने 31 दिसंबर 2025 को उस भूमि का दाखिल खारिज खरीदार के नाम पर कर दिया था। याची ने गैंगस्टर एक्ट के तहत अटैच की गई संपत्ति का दाखिल खारिज करने के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी।
विज्ञापन
याची के अधिवक्ता केके तिवारी ने दलील दी कि गैंगस्टर की एफआईआर के बाद गैरकानूनी तरीके से बनाई गई संपत्ति बेच नहीं सकते। हाईकोर्ट ने कहा कि डीएम ने स्वयं अपने ही आदेश को विफल होने दिया। कोर्ट ने पाया कि खरीदार दाखिल खारिज के आधार पर विवादित भूमि पर निर्माण कार्य करने का प्रयास कर रहा था।
विज्ञापन
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (प्रशासन) झांसी को संपत्ति को तत्काल प्रभाव से कानूनी हिरासत में रखने का निर्देश दिया है। साथ ही कोर्ट ने संपत्ति पर किसी भी प्रकार के निर्माण, बिक्री या उसकी प्रकृति में बदलाव करने पर रोक लगा दी है। साथ ही विपक्षियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।