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High Court : डीएम राजस्व अधिकारी हैं, उन्हें विद्यालयों के कार्याें में हस्तक्षेप का अधिकार नहीं

Mon, 16 Dec 2024 11:06 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 16 Dec 2024 11:06 AM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संभल जिले के एक शिक्षक की याचिका पर यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने शिक्षक के निलंबन को रद्द करते हुए डीएम और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी संभल से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है। यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर ने सहायक अध्यापिका संतोष कुमारी की याचिका पर दिया।

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High Court: DM is a revenue officer, he has no right to interfere in the functioning of schools
अदालत। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि डीएम राजस्व अधिकारी हैं, उन्हें विद्यालयों के कार्यों में हस्तक्षेप का अधिकार नहीं है। ऐसे में बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों के निरीक्षण का आदेश देना और शिक्षक का निलंबन आदेश अवैधानिक है। न्यायालय ने शिक्षक के निलंबन को रद्द करते हुए डीएम और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी संभल से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है। यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर ने सहायक अध्यापिका संतोष कुमारी की याचिका पर दिया।

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संभल के एक विद्यालय में याची शिक्षिका कार्यरत थीं। उन्हें 25 अक्तूबर 2024 के आदेश से निलंबित कर दिया गया। इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। याची अधिवक्ता चंद्रभूषण यादव ने दलील दी कि डीएम के निर्देश पर एसडीएम और खंड शिक्षा अधिकारी ने विद्यालय का संयुक्त रूप से निरीक्षण किया। शिक्षिका को कार्य में खराब प्रदर्शन के आधार पर निलंबित कर दिया गया। निलंबन आदेश को रद्द करने की प्रार्थना की।

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न्यायालय ने पक्षों को सुनने के बाद कहा कि डीएम को बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों के निरीक्षण का अधिकार नहीं है। बेसिक स्कूल बेसिक शिक्षा परिषद के तहत चलते हैं। इसका नियंत्रण बेसिक शिक्षा अधिकारी के पास होता है। बीएसए अपर निदेशक, निदेशक और सचिव बेसिक शिक्षा परिषद के प्रति जवाबदेह हैं। इसका अध्यक्ष एक शिक्षा मंत्री होता है। ऐसे में डीएम की विद्यालयों के कार्यों में कोई भूमिका नहीं है।

कोर्ट ने बेसिक शिक्षा अधिकारी को भी इसके लिए जिम्मेदार माना। कहा कि उन्होंने डीएम को यह नहीं बताया कि विद्यालय के निरीक्षण का आदेश देने का उनको अधिकार नहीं है। न्यायालय ने निलंबन आदेश रद्द कर जवाब मांगा।

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