हाईकोर्ट : बाल विवाह रोकने में लापरवाही पर हाईकोर्ट खफा, प्रमुख सचिव तलब
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बाल विवाह पर प्रभावी रोक लगाने के लिए विवाह पंजीकरण से पहले वर-वधू की उम्र का सत्यापन अनिवार्य करने के अपने आदेश के अनुपालन में देरी पर नाराजगी जताई है।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बाल विवाह पर प्रभावी रोक लगाने के लिए विवाह पंजीकरण से पहले वर-वधू की उम्र का सत्यापन अनिवार्य करने के अपने आदेश के अनुपालन में देरी पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने स्टाम्प एवं पंजीकरण विभाग के प्रमुख सचिव को नौ अक्तूबर को अनुपालन आख्या और स्पष्टीकरण के साथ तलब किया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति तेज प्रताप तिवारी की एकल पीठ ने मथुरा निवासी दीपक पाल की आपराधिक अपील पर सुनवाई करते हुए दिया। कोर्ट ने दो सितंबर को विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया में उम्र के सत्यापन को लेकर विस्तृत निर्देश जारी किया था। साथ ही प्रमुख सचिव को 30 सितंबर तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया था।
पांच अक्तूबर को सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश एजीए ने अनुपालन रिपोर्ट के बारे में अनभिज्ञता जताई। कोर्ट ने तत्काल अपने आदेश की प्रति उपलब्ध कराई। इसके बाद एजीए ने संबंधित प्रमुख सचिव से संपर्क कर रिपोर्ट दाखिल करने के लिए दो दिन का समय मांगा। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए अगली सुनवाई पर प्रमुख सचिव को रिपोर्ट के साथ उपस्थित होने का निर्देश दिया।
कोर्ट ने यह भी पूछा कि दो सितंबर के आदेश की जानकारी संबंधित अधिकारियों को समय से क्यों नहीं दी गई। कोर्ट कार्यालय की रिपोर्ट में बताया गया कि अधिकारियों को अनुपालन के लिए पत्र पांच अक्तूबर को भेजा गया। कोर्ट ने इसे गंभीर लापरवाही बताते हुए कहा कि अधिकारियों का ऐसा रवैया स्वीकार्य नहीं है।
उम्र कम होने पर नहीं होगा पंजीकरण
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि विवाह के समय लड़की की उम्र 18 वर्ष और लड़के की उम्र 21 वर्ष से कम होने पर विवाह का पंजीकरण नहीं किया जाएगा। नाबालिग होने का पता चलने पर मामले की सूचना बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी और सक्षम जिला प्राधिकारी को देनी होगी। कोर्ट ने जन्म प्रमाणपत्र, बोर्ड प्रमाणपत्र, पासपोर्ट, स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस और पैन रिकॉर्ड जैसे दस्तावेज के ऑनलाइन सत्यापन की व्यवस्था करने के लिए भी कहा है। ऑनलाइन विवाह पंजीकरण प्रणाली में उम्र सत्यापन वाले आवेदनों को स्वतः चिह्नित कर सत्यापन पूरा होने तक पंजीकरण रोकने का निर्देश दिया गया है।
विवाह पंजीकरण महज औपचारिक या यांत्रिक प्रक्रिया नहीं है। पंजीकरण प्रमाणपत्र महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज है। इसका इस्तेमाल आगे कई कानूनी और प्रशासनिक मामलों में किया जा सकता है, इसलिए उम्र की जांच में किसी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए - हाईकोर्ट