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रामपुर की स्वार विधानसभा सीट पर उपचुनाव कराने का हाईकोर्ट ने दिया निर्देश
Thu, 22 Oct 2020 07:38 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 22 Oct 2020 07:38 PM IST
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पिता आजम खां के साथ अब्दुल्ला आजम
- फोटो : Social Media
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रामपुर की स्वार विधान सभा का चुनाव कराने का आदेश दिया है। यह सीट यहां के विधायक अब्दुल्ला आजम का निर्वाचन हाईकोर्ट द्वारा रद्द किए जाने की वजह से रिक्त हो गई है। नगर पालिका परिषद स्वार के पूर्व अध्यक्ष शफीक अहमद द्वारा दाखिल याचिका पर यह आदेश न्यायमूर्ति शशिकांत गुप्ता और न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की खंडपीठ ने दिया।
याची के अधिवक्ता विक्रांत पांडेय के मुताबिक स्वार विधान की सीट का चुनाव इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 16 दिसंबर 2019 को रद्द कर दिया था। क्योंकि वहां के निर्वाचित निर्वाचित विधायक अब्दुल्ला खान ने गलत जन्मतिथि प्रमाणपत्र के आधार पर चुनाव लड़ा था। वर्तमान में यूपी की सात रिक्त सीटों पर उपचुनाव हो रहा है।
मगर स्वार विधान सभा को लेकर कोई अधिसूचना जारी नहीं की गई है। अधिवक्ता का कहना था कि जनप्रितिनधित्व कानून के तहत विधानसभा की सीट छह माह से अधिवक्ता रिक्त नहीं रखी जा सकती है, इसलिए स्वार की रिक्त सीट पर भी चुनाव कराया जाए। चुनाव आयोग की ओर से इस पर आपत्ति की गई कि हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीमकोर्ट में अपील लंबित है। दूसरे याची ने चुनाव आयोग को कोई प्रत्यावेदन नहीं दिया है इसलिए याचिका पोषणीय नहीं है।
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याची के अधिवक्ता ने इसका विरोध करते हुए कहा कि सुप्रीमकोर्ट द्वारा कोई स्थगन आदेश पारित नहीं है। हाईकोर्ट को इस मामले में सीधे सुनवाई कर आदेश पारित करने का अनुच्छेद 226 में अधिकार है। राज्य सरकार का कहना था कि चुनाव अधिसूचना जारी करना निर्वाचन आयोग का काम है। राज्य सरकार स्वार सीट को रिक्त घोषित कर चुकी है। इसके बाद कोर्ट ने स्वार विधान सभा चुनाव के लिए अधिसूचना जारी करने का आदेश दिया है।
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याची के अधिवक्ता विक्रांत पांडेय के मुताबिक स्वार विधान की सीट का चुनाव इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 16 दिसंबर 2019 को रद्द कर दिया था। क्योंकि वहां के निर्वाचित निर्वाचित विधायक अब्दुल्ला खान ने गलत जन्मतिथि प्रमाणपत्र के आधार पर चुनाव लड़ा था। वर्तमान में यूपी की सात रिक्त सीटों पर उपचुनाव हो रहा है।
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मगर स्वार विधान सभा को लेकर कोई अधिसूचना जारी नहीं की गई है। अधिवक्ता का कहना था कि जनप्रितिनधित्व कानून के तहत विधानसभा की सीट छह माह से अधिवक्ता रिक्त नहीं रखी जा सकती है, इसलिए स्वार की रिक्त सीट पर भी चुनाव कराया जाए। चुनाव आयोग की ओर से इस पर आपत्ति की गई कि हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीमकोर्ट में अपील लंबित है। दूसरे याची ने चुनाव आयोग को कोई प्रत्यावेदन नहीं दिया है इसलिए याचिका पोषणीय नहीं है।
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याची के अधिवक्ता ने इसका विरोध करते हुए कहा कि सुप्रीमकोर्ट द्वारा कोई स्थगन आदेश पारित नहीं है। हाईकोर्ट को इस मामले में सीधे सुनवाई कर आदेश पारित करने का अनुच्छेद 226 में अधिकार है। राज्य सरकार का कहना था कि चुनाव अधिसूचना जारी करना निर्वाचन आयोग का काम है। राज्य सरकार स्वार सीट को रिक्त घोषित कर चुकी है। इसके बाद कोर्ट ने स्वार विधान सभा चुनाव के लिए अधिसूचना जारी करने का आदेश दिया है।