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High Court : एनबीडब्ल्यू तामील न होने पर सीपी नोएडा व एसएसपी हापुड़ हाईकोर्ट में तलब
Sat, 07 Feb 2026 02:56 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 07 Feb 2026 02:56 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हत्या के एक दोषी की अपील पर सुनवाई के दौरान पुलिस की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने पाया कि पुलिस अधिकारियों ने कथित तौर पर दोषी के साथ मिलीभगत कर उसके खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) को तामील होने से रोका।
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अदालत का फैसला।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हत्या के एक दोषी की अपील पर सुनवाई के दौरान पुलिस की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने पाया कि पुलिस अधिकारियों ने कथित तौर पर दोषी के साथ मिलीभगत कर उसके खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) को तामील होने से रोका। इसे गंभीरता से लेते हुए कोर्ट ने नाेएडा के पुलिस कमिश्नर (सीपी) और हापुड़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को 12 फरवरी 2026 को व्यक्तिगत रूप से तलब किया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सलिल कुमार राय और न्यायमूर्ति सत्यवीर सिंह की खंडपीठ ने दिया है।
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गौतमबुद्ध नगर निवासी कौशल किशोर उर्फ बाबा को 2019 में हत्या मामले में ट्रायल कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ उसने हाईकोर्ट में अपील दायर की। उसे फरवरी 2024 में जमानत मिली। हालांकि, अपील पर सुनवाई के दौरान वकील के उपस्थित न होने पर कोर्ट ने 10 अक्तूबर 2025 को अपीलकर्ता के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया था।
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कोर्ट ने पाया कि सूरजपुर थाने के प्रभारी ने रिपोर्ट दी थी कि वारंट दिया गया पर पता सत्यापित नहीं हो सका और अपीलकर्ता वहां नहीं मिला। जबकि अपीलकर्ता के स्वयं के हलफनामे के अनुसार पुलिस 10 जनवरी 2026 को उसके घर आई थी और उसे वारंट की जानकारी दी थी। कोर्ट ने कहा, ऐसा प्रतीत होता है कि अपीलकर्ता पुलिस के साथ सांठगांठ कर रहा था ताकि अदालत की कार्यवाही में बाधा डाली जा सके। यह न केवल सेवा में कदाचार है बल्कि अवमानना का मामला भी बनता है।
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कोर्ट ने कहा कि 12 फरवरी 2026 को दोपहर दो बजे दोनों पुलिस अधिकारी वारंट तामील कराने के जिम्मेदार पुलिस कर्मियों के साथ उपस्थित होंगे। संबंधित पुलिस अधिकारियों को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर यह स्पष्ट करना होगा कि वारंट तामील करने में विफलता क्यों हुई।