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हाईकोर्ट का अहम फैसला: मृत कर्मचारी पर लगाया गया बड़ा दंड रिकॉर्ड में रहने पर नहीं दी जा सकती अनुकंपा नियुक्ति

Thu, 20 Mar 2025 07:45 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 20 Mar 2025 07:45 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि मृत कर्मचारी पर लगाया गया बड़ा दंड रिकॉर्ड में रहने पर उसके उत्तराधिकारी अनुकंपा नियुक्ति की मांग नहीं कर सकते। याची के पिता पर लगाया गया दंड दो साल के लिए था। दो साल बाद याची के पिता को पदोन्नति दी गई।

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High Court Compassionate appointment cannot be given if major penalty imposed on the deceased employee
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि मृत कर्मचारी पर लगाया गया बड़ा दंड रिकॉर्ड में रहने पर उसके उत्तराधिकारी अनुकंपा नियुक्ति की मांग नहीं कर सकते। याची के पिता पर लगाया गया दंड दो साल के लिए था। दो साल बाद याची के पिता को पदोन्नति दी गई। ऐसे में याची के पिता पर लगाया गए दंड के आधार पर अनुकंपा नियुक्ति से इन्कार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए तीन महीने के भीतर कानून के अनुसार नए सिरे से विचार करने का निर्देश दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति अजय भनोट की पीठ ने सौरभ लाल की याचिका पर दिया।

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बलिया के याची सौरभ लाल के पिता अच्छेलाल बैंक में कार्यरत थे। इस दौरान उनकी मृत्यु हो गई। याची ने अनुकंपा नियुक्त के लिए आवेदन किया। इस पर बैंक अधिकारियों ने आवेदन को खारिज कर दिया। कहा गया कि सेवा के दौरान मृतक पर बड़ा दंड लगाया गया था। उनका सेवा रिकॉर्ड ठीक नहीं था। इस आधार पर उत्तराधिकारियों को अनुकंपा नियुक्ति नहीं दी जा सकती। याची ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी।

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याची अधिवक्ता नीरज त्रिपाठी ने दलील दी कि कर्मचारी पर सिर्फ दो साल के लिए ही दंड लगाया गया था। इसके बाद याची को दो पदोन्नति दी गई। यूनियन ऑफ इंडिया शाखा कलेक्ट्रेट मऊ में प्रबंधक पद पर पदोन्नति दी गई। इसके बाद रीवा के अमिलिया में उप शाखा प्रमुख के पद पर पदोन्नति दी गई। इस प्रकार मृतक को दी गई पदोन्नति के मद्देनजर उसके सेवा को असंतोषजनक नहीं कहा जा सकता है।

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पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने कहा कि 2017 में अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति की योजना में एक संशोधन किया गया था। इसके तहत कर्मचारी के खिलाफ लगाया गया बड़ा दंड उसकी मृत्यु के समय रिकॉर्ड में रहने पर अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने कहा कि याची के पिता पर लगाया गया बड़ा दंड का प्रतिकूल प्रभाव उनकी पदोन्नति के बाद जारी नहीं रहा सकता। कोर्ट ने विवादित आदेश को रद्द कर दिया।

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