High Court : भगवान श्रीकृष्ण विराजमान को प्रतिनिधि वाद बनाए जाने को दी गई चुनौती
इलाहाबाद हाईकोर्ट में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मथुरा मामले में चल रहे 18 वादों में से भगवान श्रीकृष्ण विराजमान (केस संख्या-17) को प्रतिनिधि वाद बनाए जाने के फैसले को चुनौती दी गई है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मथुरा मामले में चल रहे 18 वादों में से भगवान श्रीकृष्ण विराजमान (केस संख्या-17) को प्रतिनिधि वाद बनाए जाने के फैसले को चुनौती दी गई है। श्रीकृष्ण लला विराजमान और चार अन्य (केस-7) के वादी अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने योगेश्वर श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ ट्रस्ट, क्षत्रिय शक्तिपीठ विकास ट्रस्ट की तरफ से बृहस्पतिवार को विशेष अपील दाखिल की है।
याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने पूजा स्थल अधिनियम की विचाराधीन याचिका में 12 दिसंबर 2024 के आदेश से विवादित धार्मिक स्थलों के मामले में अगले आदेश तक किसी भी प्रभावी अंतरिम आदेश व अंतिम आदेश पारित करने से रोक लगाया है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि मथुरा मामले में केस संख्या-17 को प्रतिनिधि वाद बनाने का आदेश एक प्रभावी आदेश की श्रेणी में आता है। ऐसे में इसे रद्द किया जाना चाहिए।
प्रतिनिधिवाद का सिद्धांत तभी लागू होता है जब केस एक हो और पक्षकार बहुत, लेकिन श्रीकृष्ण जन्मभूमि केस में वर्तमान में कुल 18 केस विचाराधीन हैं और 11 जनवरी 2024 के आदेश से सभी केसों को एकीकृत किया जा चुका है। इसके साथ ही एक अगस्त 2024 के आदेश में हाइकोर्ट ने सभी केसों को पोषणीय माना है। ऐसे में एक केस को प्रतिनिधि केस बनाने से अन्य सभी केस खराब हो रहे हैं जिसमें उनका केस संख्या-7 भी शामिल है। याचिका में बताया गया कि वादी माता पक्ष से प्रभु श्रीकृष्ण के वंशज है। उनकी माता जादौन वंश से हैं और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की रिपोर्ट में जादौन क्षत्रियों को प्रभु श्रीकृष्ण का वंशज माना गया है। उन्होंने एएसआई रिपोर्ट में उल्लेखित जादौनों की वंशावली विशेष अपील व अपने केस संख्या-7 में प्रस्तुत की है।