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हाईकोर्ट : धार्मिक टैटू हटाए जाने पर केंद्र व एसएसबी उम्मीदवारी पर करे विचार

Thu, 10 Mar 2022 07:45 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 10 Mar 2022 07:45 AM IST
सार

याची व दो अन्य अभ्यर्थी एसएसबी में हेड कांस्टेबल पद के लिए परीक्षा में शामिल हुए थे। मई 2021 में घोषित परिणाम में उन्हें सफल घोषित किया गया। याचिकाकर्ता टाइपिंग टेस्ट के लिए उपस्थित हुए और उन्हें 17 सितंबर 2021 को टाइपिंग टेस्ट में भी सफल घोषित किया गया।

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High Court: Center and SSB should consider candidature on removal of religious tattoo
Prayagraj News : इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : प्रयागराज

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) भर्ती परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों के हाथों पर धार्मिक टैटू होने पर हेड कांस्टेबल के पद पर अनफिट करार दिए जाने के मामले में राहत प्रदान की है। हाईकोर्ट ने केंद्र और एसएसबी को निर्देश दिया है कि यदि उम्मीदवार धार्मिक टैटू को हटा देते हैं तो उनकी उम्मीदवारी पर विचार किया जाना चाहिए। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा की खंडपीठ ने अवनीश कुमार व दो अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।

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याची व दो अन्य अभ्यर्थी एसएसबी में हेड कांस्टेबल पद के लिए परीक्षा में शामिल हुए थे। मई 2021 में घोषित परिणाम में उन्हें सफल घोषित किया गया। याचिकाकर्ता टाइपिंग टेस्ट के लिए उपस्थित हुए और उन्हें 17 सितंबर 2021 को टाइपिंग टेस्ट में भी सफल घोषित किया गया।
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इसके बाद जब 13 नवंबर 2021 को उनकी चिकित्सकीय जांच की गई, जिसमें वे स्वस्थ पाए गए। लेकिन उनके दाहिने हाथों के अग्रभाग में एक निश्चित हिस्से पर धार्मिक टैटू बने हुए थे। इस कारण उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया। टैटू हटाने केलिए उन्हें कोई मौका नहीं दिया गया था।

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टैटू हटाने के बाद किया आवेदन, लेकिन नहीं हुआ विचार
बाद में उम्मीदवारों ने टैटू हटकार एसएसबी के समक्ष अभ्यावेदन दिया लेकिन उस पर कोई कार्यवाही नहीं की गई। अभ्यर्थियों ने मामले में हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिकाकर्ताओं के वकील का तर्क था कि याचिकाकर्ताओं ने अभ्यावेदन के जरिए आग्रह किया था कि यदि उन्हें एक अवसर प्रदान किया जाता है तो वे टैटू हटा देंगे और उसके बाद याचिकाकर्ताओं का चिकित्सकीय परीक्षण फिर से किया जा सकता है।




इसके जवाब में भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल का कहना था कि जहां तक टैटू हटाने का संबंध है, प्रतिवादी उच्च न्यायालय के डिवीजन बेंच के फैसले से बाध्य होंगे। हालांकि, उन्होंने कहा कि दो याचियों को मायोपिया और व्यापक टेनिया वर्सिकलर भी था। उन्हें तभी समायोजित किया जा सकता है, जब वे इस रोग से मुक्त हों।




कोर्ट ने कहा कि यदि याचिकाकर्ताओं के टैटू हटा दिए जाते हैं तो उस विशेष विकलांगता को मंत्री पदों पर चयन के लिए बाधा नहीं माना जा सकता है, जिसके लिए याचिकाकर्ताओं ने आवेदन किया है। हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर दो याजियों में कोई विकलांगता थी जो प्रतिवादियों के अनुसार प्रकृति में स्थायी थी तो उन पर विचार नहीं किया जा सकता है।

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