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Prayagraj News: हाईकोर्ट ने बार के बैंक खाता संचालन पर लगाई रोक, सुनवाई 13 फरवरी को
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इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के संविधान की अनदेखी मामले में सोमवार को हाईकोर्ट ने बार के बैंक खाता संचालन पर रोक लगा दी। बार के कोषाध्यक्ष की ओर से दायर की गई याचिका पर सुनवाई के दौरान साक्ष्यों को देखने और याची के अधिवक्ता रितेश कुमार श्रीवास्तव को सुनने के बाद कोर्ट ने बार के अध्यक्ष, महासचिव, बैंक प्रबंधक और अन्य को नोटिस भी जारी किया।
याची के अधिवक्ता रितेश श्रीवास्तव ने बार के संविधान के नियम 28, 49 (1), 20(ए) को न्यायालय के समक्ष रखा। न्यायमूर्ति एसडी सिंह और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की पीठ ने 12 जनवरी को शाखा प्रबंधक की ओर से बार अध्यक्ष को लिखे और महानिबंधक उच्च न्यायालय को सूचनार्थ प्रेषित पत्र को देखने के बाद नोटिस जारी करने का आदेश दिया। अब अगली सुनवाई 13 फरवरी को होगी।
मुकदमे को मुकदमे की तरह लड़ें
याचिका की सुनवाई के दौरान संयुक्त सचिव पुस्तकालय ने जब कोर्ट के समक्ष कुछ कहना चाहा तो कोर्ट ने पूछा कि क्या बार ने आपको अधिकृत किया है। किस अधिकार के तहत अपनी बात रखना चाहते हैं। न्यायमूर्ति ने कहा, मुकदमे को मुकदमे की तरह लड़ें।
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वहीं कोषाध्यक्ष आशीष कुमार मिश्र ने कहा, मैं बार के आम अधिवक्ताओं एवं बार के संविधान की रक्षा की लड़ाई लड़ रहा हूं। हाईकोर्ट बार के पदाधिकारियों की ओर से संविधान का खुला उल्लंघन किया जा रहा है। बार का पैसा आम अधिवक्ताओं का पैसा है। इसका उपयोग अधिवक्ताओं के हित में ही होना चाहिए।
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याची के अधिवक्ता रितेश श्रीवास्तव ने बार के संविधान के नियम 28, 49 (1), 20(ए) को न्यायालय के समक्ष रखा। न्यायमूर्ति एसडी सिंह और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की पीठ ने 12 जनवरी को शाखा प्रबंधक की ओर से बार अध्यक्ष को लिखे और महानिबंधक उच्च न्यायालय को सूचनार्थ प्रेषित पत्र को देखने के बाद नोटिस जारी करने का आदेश दिया। अब अगली सुनवाई 13 फरवरी को होगी।
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मुकदमे को मुकदमे की तरह लड़ें
याचिका की सुनवाई के दौरान संयुक्त सचिव पुस्तकालय ने जब कोर्ट के समक्ष कुछ कहना चाहा तो कोर्ट ने पूछा कि क्या बार ने आपको अधिकृत किया है। किस अधिकार के तहत अपनी बात रखना चाहते हैं। न्यायमूर्ति ने कहा, मुकदमे को मुकदमे की तरह लड़ें।
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वहीं कोषाध्यक्ष आशीष कुमार मिश्र ने कहा, मैं बार के आम अधिवक्ताओं एवं बार के संविधान की रक्षा की लड़ाई लड़ रहा हूं। हाईकोर्ट बार के पदाधिकारियों की ओर से संविधान का खुला उल्लंघन किया जा रहा है। बार का पैसा आम अधिवक्ताओं का पैसा है। इसका उपयोग अधिवक्ताओं के हित में ही होना चाहिए।